बजट सत्र के दूसरे चरण में ईरान-इजराइल संघर्ष पर भारी हंगामा। विदेश मंत्री ने बताया कि अब तक 67,000 भारतीय सीमा पार कर चुके हैं। जानें खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर भारत की रणनीति।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन की शुरुआत काफी गहमागहमी भरी रही। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के वैश्विक और स्थानीय प्रभावों को लेकर राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों की मुख्य मांग इस युद्ध से उत्पन्न स्थितियों पर विस्तृत चर्चा की थी। हंगामे के बीच विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट भी किया। लोकसभा में भी स्थिति वैसी ही रही, जहाँ सांसदों ने 'We Want Discussion' के नारों के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन में बार-बार व्यवधान डाला।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी (Evacuation)
विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन को खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि युद्ध क्षेत्र और आसपास के इलाकों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं। 8 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर सुरक्षित स्थानों की ओर बढ़ चुके हैं। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित मंत्रालय आपस में समन्वय (Coordination) कर रहे हैं ताकि हर भारतीय की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।
ईरान में नेतृत्व का संकट और भारत की चिंता
एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में ईरान के भीतर नेतृत्व स्तर पर भारी क्षति हुई है, जिसके कारण वहां की लीडरशिप से संपर्क साधना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि "ईरान में कई महत्वपूर्ण नेता मारे गए हैं और बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पूरी तरह तबाह हो गया है।" हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह शांति और संवाद का पक्ष लिया है। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाह (कोच्चि) पर अपने युद्धपोत 'लावन' को डॉक करने की अनुमति देने के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है।
ऊर्जा सुरक्षा और नाविकों की शहादत
भारत के लिए यह युद्ध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और आर्थिक भी है। पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। इसके अलावा, यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का केंद्र है। सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। विदेश मंत्री ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि संघर्ष के दौरान हमने अपने दो जांबाज भारतीय नाविकों को खो दिया है, जबकि एक अभी भी लापता है। शिपिंग डायरेक्टरेट ने सभी नाविकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे दूतावास की एडवाइजरी का पालन करें और अनावश्यक आवाजाही से बचें।
भविष्य की स्थिति
विदेश मंत्री के अनुसार, लड़ाई अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रही बल्कि अन्य खाड़ी देशों तक फैल गई है। सुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और तबाही का दायरा बढ़ता जा रहा है। भारत सरकार इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और प्राथमिकता केवल और केवल अपने नागरिकों की जान बचाना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना है।
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