सतना के पाठक अस्पताल में पथरी इलाज में लापरवाही से युवक की मौत के बाद जांच टीम पर सवाल उठे हैं। टीम में प्रशासनिक अधिकारी न होने से निष्पक्ष जांच पर संदेह गहराया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
चाणक्य पूरी कालोनी स्थित पाठक हॉस्पिटल में पथरी के इलाज में लापरवाही से युवक की मौत हो गई और इसे बस एक साधारण घटनाक्रम समझकर एक सामान्य जांच टीम बना दी गई ताकि विभाग के ऊपर कोई उंगली न उठा सके। तीन माह तक मरीज को अस्पताल में इलाज कर लूटा गया और अंत समय में उसे रीवा रेफर किया गया जहां उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से लोगों का जिले के चिकित्सकों से भरोसा तक उठा गया है। यहां तक कि मरीज की दोनों किडनी भी खराब कर दी गई। मरीज की सर्जरी करने वाले चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने वायरल वीडियो में गलती भी स्वीकारी है। इसके बाद भी अब तक कोई कड़ा ऐक्शन नहीं लिया गया। मामला इतना सामान्य नहीं है जितना इसे जांच टीम आदेश कर सामान्य बना दिया गया है। गौरतलब है कि सीएमएचओ डा. मनोज शुक्ला द्वारा जांच के लिए जिला अस्पताल के पांच सदस्यों की टीम बनाई है। टीम को एक सप्ताह के भीतर शिकायत पत्र के आधार पर जांच के लिए कहा गया है। बड़ी बात यह है कि जांच में एडमिनिस्ट्रेटिव कैडर का कोई भी अधिकारी नहीं है जिसे जांच टीम का अध्यक्ष बनाया गया हो। जबकि स्वास्थ्य विभाग में जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) 1, डीएचओ 2 एवं जिला टीकाकरण अधिकारी (डीआईओ) जैसे अधिकारी भी कार्यरत हैं। सवाल यह है कि इन अधिकारियों के होते हुए मेडिकल स्पेस्लिस्ट को जांच का अध्यक्ष क्यों बनाया गया?
गौरतलब है कि रवि रजक निवासी देवेन्द्र नगर उम्र 26 साल का इलाज पाठक हास्पिटल में चल रहा था। मुख्त्यारगंज स्थित सुपर स्टार स्पेशलिटी के चिकित्सक डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह द्वारा मरीज का इलाज पाठक हास्पिटल में किया जा रहा था। मरीज को पथरी की शिकायत थी। मरीज की दोनों किडनियां खराब होने पर रीवा सुपर स्पेशलिटी में भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने बताया कि मरीज की किडनी में गलत कट लगने से किडनी काम नहीं कर रही है।
खुलते ही विवादों में था सुपर स्टार स्पेसिलिटी हॉस्पिटल
मुख्तियार गंज स्थित सुपर स्टार स्पेसिलिटी हॉस्पिटल शुरू से विवादों में घिरा रहा है। अस्पताल खुलने से पहले ही तत्कालीन सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था, जिसका जवाब आज तक नहीं दिया गया। बताया जाता है कि अस्पताल के संचालक योगेश शर्मा द्वारा सीएमएचओ और डीन को अस्पताल का संरक्षक तक बताया गया था जिस पर हंगामा खड़ा हो गया था। उसके बाद हॉस्पिटल लाइसेंस प्रक्रिया में भी कुछ सवाल उठे थे। डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भी सुपर स्टार स्पेसिलिटी हॉस्पिटल के संचालक पार्टनर हैं, जिन्होंने अपना अस्पताल छोड़ पाठक हॉस्पिटल में मरीज का इलाज और सर्जरी की थी।
पाठक हॉस्पिटल में चलता है आयुष्मान का खेल
इस समय चाणक्य पूरी कालोनी स्थित पाठक हॉस्पिटल भी मरीजों को लूटने और इलाज में लापरवाही को लेकर सुर्खियां बटोर रहा है। हितग्राही की शिकायत पर अस्पताल के संचालक डॉ. राजीव पाठक को भी तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. एलके तिवारी द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। बताया जाता है कि आयुष्मान हितग्राही से जांच और दवा के नाम पर राशि वसूलने एवं इलाज में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया था। यहां तक कि मरीज की स्थिति गंभीर होने पर मरीज स्वयं अस्पताल से डिस्चार्ज होकर हायर सेंटर इलाज के लिए चला गया था, तब जाकर मरीज की जान बची थी। इसी अस्पताल में एक बार फिर मरीज के इलाज में लापरवाही बरती गई लेकिन इस बार गंभीर मरीज ने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने 10 को दिया था शिकायती पत्र
जानकारी के मुताबिक जिस शिकायती पत्र के आधार पर सीएमएचओ द्वारा चिकित्सक के खिलाफ जांच बैठाई है, वह पत्र परिजनों द्वारा 10 अप्रैल को ही सीएमएचओ कार्यालय में दे दिया गया था। पत्र में मृतक की मां ने पूरी जानकारी दी थी और शिकायत की थी कि पुत्र के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। इलाज के दौरान उसकी एक किडनी भी खराब कर दी गई है। सोचने वाली बात यह है कि इस शिकायती पत्र पर ध्यान ही नहीं दिया गया और मरीज को जान से हाथ धोना पड़ा। पत्र के दो दिन बाद 13 अप्रैल को मरीज की मौत हो गई।


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