केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CII समिट 2026 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और तेल कंपनियों के ₹1 लाख करोड़ के घाटे पर बड़ी जानकारी दी। जानें देश का बफर स्टॉक और भविष्य की रणनीति।

नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन के भविष्य पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि वैश्विक तनाव और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय बोझ के कारण आने वाले समय में कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वर्तमान में भारी दबाव में हैं। उपभोक्ताओं को वैश्विक महंगाई से बचाने के लिए कंपनियां स्वयं बड़ा नुकसान उठा रही हैं। तेल कंपनियां वर्तमान में हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा सह रही हैं। चालू तिमाही का कुल घाटा ₹1 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान कंपनियों ने जो भी मुनाफा कमाया था, वह वर्तमान घाटे की भरपाई में खत्म हो चुका है।
हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि पिछले चार वर्षों से कीमतों को स्थिर रखना एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना अब एक चुनौती बन गया है। मंत्री ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया कि कीमतों को विधानसभा चुनावों के कारण स्थिर रखा गया था। उन्होंने दो टूक कहा कि पेट्रोल-डीजल की दरों का चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार ने राजनीतिक लाभ के बजाय वैश्विक चुनौतियों के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया है।
ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश के पास किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार (Strategic Reserves) मौजूद है।
इसके साथ ही, LPG का उत्पादन 35,000 टन से बढ़ाकर 56,000 टन कर दिया गया है, जिससे देश के किसी भी कोने में ईंधन खत्म होने (Dry Out) की नौबत नहीं आएगी।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक युद्ध की स्थितियां और तनाव बरकरार रहता है, तो देश के राजकोषीय स्वास्थ्य (Fiscal Health) की रक्षा के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता वैश्विक अस्थिरता के बीच अर्थव्यवस्था और आम आदमी के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
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