RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले से पहले जानें कि रेपो रेट बढ़ने, घटने या स्थिर रहने पर आपकी होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर क्या असर पड़ेगा।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
अक्टूबर महीने में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर देश भर के आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच RBI का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि रेपो रेट से जुड़ा अंतिम फैसला बैठक के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि यदि केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाता है, तो आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर किस तरह पड़ सकता है।
सरल शब्दों में कहें तो रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर देश का केंद्रीय बैंक यानी RBI commerciales बैंकों को शॉर्ट-टर्म लोन देता है। जब इस दर में बढ़ोतरी की जाती है, तो बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इस बढ़ी हुई लागत का असर अंततः आम जनता तक पहुंचता है, जिससे बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन और ब्याज दरों को महंगा कर देते हैं। इसके विपरीत, रेपो रेट घटने पर बैंकों के लिए फंड जुटाना आसान और सस्ता हो जाता है।
यदि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की वृद्धि करता है, तो फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट वाले लोन लेने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है और ब्याज दर 8.5% से बढ़कर 8.75% हो जाती है, तो उसकी मासिक EMI लगभग 43,391 रुपये से बढ़कर 44,186 रुपये तक पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि हर महीने करीब 795 रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है। हालांकि, यह बदलाव हर बैंक के नियमों और आपके लोन के बकाया कार्यकाल पर भी निर्भर करता है।
रेपो रेट में बदलाव का असर केवल होम लोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह ऑटो लोन और कुछ चुनिंदा पर्सनल लोन जैसे अन्य फ्लोटिंग रेट कर्जों को भी प्रभावित करता है। जिन लोगों ने पहले से ही फ्लोटिंग दरों पर कर्ज ले रखा है, उनके लिए केंद्रीय बैंक का यह रुख काफी मायने रखता है। हालांकि, यदि आपने फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट पर लोन लिया है, तो रेपो रेट में होने वाले फेरबदल का आपकी मौजूदा EMI पर कोई तात्कालिक प्रभाव नहीं पड़ता है।
यदि RBI रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखता है, तो आपकी मौजूदा EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों में कोई तुरंत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। वहीं, इसके विपरीत यदि केंद्रीय बैंक उम्मीद के उलट दरों में कटौती करता है, तो कर्जदारों की EMI घट जाएगी या उनके लोन की अवधि कम हो सकती है। हालांकि, इसका नकारात्मक पहलू यह होगा कि बैंक नई FD पर मिलने वाले ब्याज को कम कर सकते हैं, जिससे निवेशकों को भविष्य में पहले जैसा रिटर्न मिलना मुश्किल हो जाएगा।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले से पहले जानें कि रेपो रेट बढ़ने, घटने या स्थिर रहने पर आपकी होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर क्या असर पड़ेगा।
टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में दरार आ गई है। सीनियर ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने बिना सलाह के फैसले लेने पर आपत्ति जताई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

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