सितपुरा स्थित रिलायंस बायो फ्यूल संयंत्र से जुड़े जल प्रदूषण मामले की संयुक्त जांच आज होगी। एनजीटी के निर्देश पर प्रशासन और एमपीपीसीबी स्थल निरीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करेंगे।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के सितपुरा क्षेत्र में संचालित रिलायंस बायो फ्यूल एनर्जी लिमिटेड के संयंत्र से जुड़े कथित जल प्रदूषण प्रकरण में आज महत्वपूर्ण मोड़ आने जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट आदेशों के बाद गठित संयुक्त जांच समिति आज स्थल निरीक्षण करेगी। यह कार्रवाई ओरिजिनल एप्लीकेशन क्रमांक 24/2026 (सीजेड) में 2 फरवरी 2026 को पारित एनजीटी के निदेर्शों के पालन में की जा रही है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने प्रारंभिक सुनवाई में मामले को ह्यगंभीर पर्यावरणीय प्रश्नह्ण मानते हुए प्रशासन और उद्योग प्रबंधन दोनों से जवाब तलब किया था तथा चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इसी क्रम में अब जमीनी जांच शुरू हो रही है।
क्या है पूरा मामला
प्रकरण एक स्थानीय कृषक की याचिका से सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि संयंत्र से निकला अपशिष्ट जल और सीवेज बहकर उनकी निजी भूमि पर बने लगभग चार एकड़ के तालाब में पहुंच गया। यह जलाशय सिंचाई के साथ-साथ मछली पालन का प्रमुख आधार था। शिकायत के अनुसार अगस्त 2025 में अपशिष्ट जल के ओवरफ्लो के बाद तालाब का पानी काला पड़ गया, दुर्गंध फैलने लगी और बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो गई। स्थानीय स्तर पर इसे कई टन मत्स्य क्षति बताया गया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में जल गुणवत्ता प्रभावित हुई तथा ग्रामीणों ने दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायतें दर्ज कराईं। इस मामले में ग्रामीणों की ओर से एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया था।
जल परीक्षण में मिले सीवेज के संकेत
जांच के दौरान लिए गए नमूनों की रिपोर्ट में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अत्यधिक मात्रा पाई गई थी। इसे सीवेज मिश्रण और जैविक प्रदूषण का संकेत माना गया। मत्सय पालन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना था कि जलाशय में उच्चस्तर का प्रदूषण बढ़ने के कारण ही हजारों मछलियां काल के गाल में समा गर्इं। एनजीटी ने टिप्पणी की थी कि ऐसे तत्व मानव स्वास्थ्य, पशुधन और पर्यावरणीय संतुलन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल निजी क्षति का विवाद नहीं, बल्कि व्यापक पर्यावरणीय दायित्व का प्रश्न है।
रिपोर्ट पर निर्भर करेगा अगला कदम
मामले को 22 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर ट्रिब्यूनल आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो दायित्व निर्धारण, मुआवजा और पर्यावरणीय सुधारात्मक उपायों पर भी विचार संभव है। सितपुरा का यह प्रकरण अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर औद्योगिक अनुपालन और पर्यावरणीय जवाबदेही की कसौटी बन चुका है। आज का निरीक्षण इस पूरे विवाद की दिशा और भविष्य तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
चार सप्ताह में देना है जवाब
एनजीटी ने जिला प्रशासन और मप्र पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (एमपीपीसीबी) को शामिल करते हुए संयुक्त समिति गठित की है। एनजीटी ने जांच समिति को अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र की वास्तविक स्थिति, किसी भी अनधिकृत डिस्चार्ज की पुष्टि और पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं संचालन शर्तों का अनुपालन संबंधी बिंदुओं की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। समिति को चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत करनी है।
एमपीपीसीबी ने जारी किया पत्र
एमपीपीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय, द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2005/क्षे.का/प्र.नि.बो./पूर्व/2026 के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), नागौद को संयुक्त निरीक्षण की सूचना दी गई है। पत्र में उल्लेख है कि 25 फरवरी को प्रात: 10:30 बजे से निरीक्षण किया जाएगा। बोर्ड की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी को इस प्रकरण में ओआईसी (आॅफिसर इन चार्ज) नियुक्त किया गया है। पिटिशनर को निरीक्षण के दौरान उपस्थित रहने हेतु सूचित किया गया है, ताकि स्थल पर तथ्यात्मक स्थिति का सम्यक आकलन हो सके।


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