सतना नगर निगम क्षेत्र में जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए 155 आवेदन पहुंचे। कर्मचारियों ने बीमारी, पारिवारिक जिम्मेदारी, कैंसर, एलर्जी और अन्य निजी कारण बताकर राहत मांगी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनगणना के काम में लगाए जाने वाले कर्मचारियों ने ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। अकेले नगर निगम क्षेत्र में ड्यूटी कैंसिल कराने के लिए 155 आवेदन अब तक आ चुके हैं। ड्यूटी से मुक्ति के लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों द्वारा वैवाहिक कार्यक्रमों, स्वास्थ्य खराब होना और एलर्जी समेत कई अन्य कारण बताए गए हैं।
जनगणना कार्य में लगी ड्यूटी को कटवाने के लिए कर्मचारी तरह -तरह के बहाने अपना रहे हैं, ज्यादातर बहाने मेडिकल से जुड़े आ रहे हैं। कोई हाई ब्लड प्रेशर के बहाने अपनी ड्यूटी कटवाना चाहता है तो किसी के पास अन्य तरह की मेडिकल समस्याएं। एक ने तो ड्यूटी कटवाने के लिए अपनी पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए आवेदन दिया है कि साहब... मेरी पत्नी को कैंसर है मेरा नाम जनगणना के कार्य से कटवा दीजिए। जनगणना से अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए कुछ कर्मचारी जिम्मेदार अधिकारी को जहां सीधे आवेदन कर रहे हैं वहीं कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने इसके लिए जनप्रतिनिधियों तक से दबाव डलवाया है। यहां उल्लेखनीय है कि नगरीय क्षेत्र के पांच जोन में जनगणना के लिए 420 ब्लाक बनाए गए हैं और इसमें शिक्षा और महिला बाल विकास समेत अन्य विभागों के लगभग 600 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें से 155 ने बीमारियों समेत अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए ड्यूटी से उन्हें अलग रखने का आग्रह किया है।
घरेलू जिम्मेदारियों का भी हवाला
आवेदनों में शिक्षकों द्वारा घरेलू जिम्मेदारियों को भी ढाल बनाया जा रहा है। कई शिक्षिकाओं का तर्क है कि वे घर में अकेली हैं और जनगणना पर जाने से घर के काम और बच्चों की देखभाल प्रभावित होगी। छोटे बच्चों का हवाला देकर नाम कटवाने की इनकी कोशिशें जारी हैं।
कुछ के जायज कारण
स्वास्थ्य व निजी कारणों से ड्यूटी कटवाने के कई आवेदन आए हैं। जनगणना कार्य में लगी ड्यूटी कटवाने के लिए आ रहे आवेदनों में तो कई आवेदनों में जो कारण दिए जा रहे हैं वे हकीकत से कोसों दूर हैं, लेकिन कुछ आवेदन ऐसे भी हैं जिसमें हकीकत है पर तकनीकी समस्याओं के कारण उन पर भी समय से निर्णय नहीं हो पा रहा है। ऐसे आए आवेदनों में से एक आवेदन ऐसा भी आया जिसमें एक शिक्षक के बेटे का बैंगलोर में एक्सीडेंट हो गया, जिस वजह से शिक्षक का बेटा कोमा में चला गया है। ऐसे आवेदनों पर मानवीय दृष्टिकोण से जल्द से जल्द अमल के प्रयास होने चाहिए पर इसमें भी दिक्कत आ रही है। एक बार ड्यूटी में नाम डिजीटल अपलोड होने के बाद उसे काटने में कई तकनीकी परेशानी आ रही है।
ड्यूटी लगाने में विसंगतियां भी
जनगणना कार्य में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने में कई विसंगतियां भी सामने आई हैं। कई ऐसे कर्मचारियों की भी ड्यूटी घर-घर जनगणना में लगाई गई है जो 55 से 58 साल से ऊपर के हैं इन्हें हाई ब्लडप्रेशर, सुगर जैसी कई गंभीर बीमारियां हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में फील्ड में इन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की बजाय इनसे कार्यालयीन काम लिया जा सकता है।
इन्हें बनाया गया चार्ज अधिकारी
नगरीय क्षेत्र में जनगणना के लिए 420 ब्लाकों के बीच पांच चार्ज अधिकारी बनाया गया है। जिन पांच को चार्ज अधिकारी बनाया गया है उनमें कार्यपालन यंत्री मुकेश चतुर्वेदी,सहायक उपयंत्री के पी गुप्ता,आकाश बट्टी, मनीष वर्मा एवं दीपका बागरी के नाम शामिल हैं, जिनकी आईडी से ही शहरी क्षेत्र में जनगणना का सारा कार्य होना है।
जूनियर को बनाया पर्यवेक्षक सीनियर को प्रगणक
जनगणना कार्य में लगाई ड्यूटी को लेकर कर्मचारियों में एक अलग तरह का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। कई कर्मचारी इस वजह से भी जनगणना कार्य से अपना नाम कटवाने के लिए परेशान हो रहे हैं कि उनकी ड्यूटी उनके जूनियर के अंडर में लगा दी गई है। इस तरह की विसंगति सबसे ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी में सामने आ रही है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई शिक्षक संविदा वर्ग एक है और उसकी ड्यूटी संविदा वर्ग दो और तीन के शिक्षक के आधीन लगा दी गई है। ड्यूटी चार्ट में संविदा वर्ग एक के शिक्षक को जहां प्रगणक बनाया गया वहीं संविदा वर्ग दो और तीन के शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाया गया है। इस वजह से शिक्षकों में जनगणना कार्य की ड्यूटी को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि उन्हें प्रगणक से हटाकर या तो पर्यवेक्षक बनाया जाए या फिर उनकी ड्यूटी काटी जाए,हम जूनियर के आधीन काम नहीं करेंगे।
जनगणना के कार्य के लिए अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। कर्मचारी ड्यूटी करने में रुचि नहीं ले रहे, वे ड्यूटी से अपना नाम कटवाने के लगातार आवेदन दे रहे हैं, जिसमें वे मेडिकल तथा अन्य समस्या का हवाला दे रहे हैं। कर्मचारियों के इन आावेदनों पर नगर निगम कमिश्नर से चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
सत्यम मिश्रा, उपायुक्त एवं जनगणना अधिकारी नगर निगम क्षेत्र
इसलिए भी नहीं ले रहे दिलचस्पी
इन वजहों से कट सकता है नाम
इसके लिए दस्तावेज आवश्यक
इन समस्याओं का दिया जा रहा हवाला


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