सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में की 26 साल की सबसे बड़ी कटौती। जानिए इसका भारतीय अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई पर क्या असर पड़ेगा।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
वैश्विक ऊर्जा बाजार में सऊदी अरब ने एक बड़ा फेरबदल करते हुए कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 26 वर्षों की सबसे बड़ी कटौती की है। अगस्त महीने के लिए 'अरब लाइट क्रूड' की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कमी की गई है, जबकि जुलाई में भी 6 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण सऊदी अरब ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।
सऊदी अरब ने अपनी बाजार हिस्सेदारी (Market Share) बनाए रखने और एशियाई ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए यह निर्णय लिया है। वर्तमान में फारस की खाड़ी के देशों ने उत्पादन बढ़ाया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति फिर से सुचारू हो गई है। ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन पर सहमति व्यक्त की है। बाजार में तेल की बढ़ती आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर 71.7 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का 85% से अधिक आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय रिफाइनरियों की परिचालन लागत में कमी आएगी। इससे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हो रहे नुकसान में कमी आने की संभावना है और सरकार पर एलपीजी सब्सिडी का बोझ भी घटेगा। हालांकि, आम नागरिकों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलेगी या नहीं, यह सरकार की टैक्स नीति और कंपनियों के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सीधा असर देश की महंगाई दर पर पड़ सकता है। परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक निर्माण की लागत घटने से वस्तुओं की ढुलाई सस्ती होगी, जिससे उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का दबाव कम हो सकता है। यदि यह गिरावट बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार घाटे को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से शेयर मार्केट पर काफी असर पड़ा है। सेंसेक्स टूटकर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ निचले स्तर पर आ गया।
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ईरान पर अमेरिका के ताबड़तोड़ हमले के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हाहाकार मच गया है। निफ्टी और सेंसेक्स गिरावट के साथ खुले हैं। ईरान ने स्ट्रेट आफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे कच्चे तेल के दाम में फिर उछाल आ गया है। कच्चे तेल में तेजी से शेयरों में गिरावट आ गई है जबकि ओएनजीसी के स्टॉक उछल गए हैं।
आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शानदार रही। सेंसेक्स और निफ्टी तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में रौनक लौटती हुई नजर आई। वहीं, चुनिंदा एफएमसीजी और फार्मा शेयरों में सीमित कारोबार देखने को मिला।
भारतीय शेयर बाजार में कल की भारी मंदी के बाद आज सुबह दर्ज हुई बड़ी रिकवरी। सेंसेक्स मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी फिर से छलांग लगता नजर आया। दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 4 पैसे गिरकर 95.52 पर आ गया।
अमेरिका के ईरान पर सैन्य कार्रवाई और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते आज एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत में ही औंधे मुंह गिरता नजर आया। बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स टूटकर खुला। वहीं, एनएसई के निफ्टी 50 ने कमजोरी के साथ कारोबार की शुरुआत की।
7 जुलाई 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना 146,020 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। महानगरों के ताजा रेट्स यहाँ देखें।
सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में की 26 साल की सबसे बड़ी कटौती। जानिए इसका भारतीय अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई पर क्या असर पड़ेगा।
आज सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर खुले। शुरुआती कारोबार में वर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे मजबूत हुआ। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 26 साल में पहली बार इतनी बड़ी कटौती हुई है।
भारतीय शेयर बाजार की ओपनिंग हफ्ते के पहले दिन ग्रीन रही। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी तेजी देखी जा रही है। कई बड़े बैंकों के मजबूत नतीजों से निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है। बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स उछलकर हाई लेवल पर कारोबार की शुरुआत की।