ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की। ट्रंप के संघर्षविराम विस्तार के बावजूद समुद्री घेराबंदी को लेकर तनाव बरकरार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा

तेहरान/वॉशिंगटन। स्टार समाचार वेब
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को ईरानी सेना द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में तीन व्यापारिक जहाजों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी खतरे के बादल मंडरा दिए हैं।
ईरान की अर्धसैनिक इकाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने बुधवार सुबह इस आक्रामक कार्रवाई को अंजाम दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, सेना ने पहले एक कंटेनर जहाज पर हमला किया और फिर दूसरे को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। पकड़े गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है, जिन्हें ईरानी सेना ने अपने कब्जे में ले लिया है। एक तीसरा जहाज, यूफोरिया, भी हमले की चपेट में आया है और वर्तमान में ईरानी तट पर फंसा हुआ है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को समाप्त हो रहे संघर्षविराम (Ceasefire) को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी (Naval Blockade) जारी रहेगी। ईरान इसी दोहरी नीति से आक्रोशित है। ईरानी राजनयिकों का दो टूक कहना है कि जब तक अमेरिका समुद्री घेराबंदी नहीं हटाता, वे किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होंगे।
होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है, जो युद्ध की शुरुआत के बाद से 35% की भारी बढ़ोतरी है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है।
शांति बहाली की कोशिशों में लगा पाकिस्तान फिलहाल ईरान के सकारात्मक जवाब का इंतजार कर रहा है। इस्लामाबाद अगले दौर की वार्ता की मेजबानी का इच्छुक है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी घेराबंदी खत्म होने तक उनका कोई भी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं जाएगा। फिलहाल कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं और हथियारों की होड़ बढ़ती जा रही है।
28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण संघर्ष में अब तक हजारों लोग जान गंवा चुके हैं:
ईरान: कम से कम 3,375 लोगों की मौत।
लेबनान: 2,290 से ज्यादा नागरिकों की जान गई।
इस्राइल: 23 नागरिक और 15 सैनिकों की मौत।
अमेरिका: क्षेत्र में तैनात 13 सैनिकों ने जान गंवाई।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की धमकियों और कट्टरपंथियों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच, पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें फिलहाल धूमिल होती दिख रही हैं।

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अमेरिका-ईरान के बीच बीते दिन शांति समझौते की घोषणा की गई, लेकिन अब इसमें पेंच फंसता नजर आ रहा है। महीनों से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान ने जिस भारी भरकम फंड 300 अरब डॉलर की मांग की है, उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण के तहत स्लोवाकिया पहुंचे। इस दौरान वह स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा वह व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होंगे। इसमें स्ट्रेट आफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापार फिर से शुरू करने का एलान भी शामिल है। होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि रविवार को ईरान के साथ शांति समझौता होगा और यूरेनियम नष्ट किया जाएगा। वहीं ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए होर्मुज स्ट्रेट पर नया टैक्स लगाने के संकेत दिए हैं।
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