सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। डॉक्टरों के 60% और स्वास्थ्यकर्मियों के 30% पद खाली हैं। नियमित डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में नदारद रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस में लगे हैं, जबकि संविदा डॉक्टरों के भरोसे मरीजों की जान बच रही है।
सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य आयुक्त का नया आदेश अधिकारियों में खलबली मचा रहा है। जिले के केवल तीन डॉक्टरों को ही स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान मिला। वहीं 108 एम्बुलेंस सेवा "खटारा एक्सप्रेस" में तब्दील हो चुकी है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रशासन मौन है।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल से तीन डॉक्टरों के इस्तीफे ने स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ा झटका दिया है। यूरोलॉजी विभाग के डॉ विवेक शर्मा और डॉ विजय शुक्ला ने नोटिस देकर अस्पताल छोड़ने का निर्णय लिया है। वहीं संजय गांधी अस्पताल की एक गायनेकोलॉजिस्ट ने भी नौकरी छोड़ निजी अस्पताल शुरू कर दिया है। डॉक्टरों की कमी से मरीजों की परेशानी और बढ़ने की आशंका।
सिरमौर का 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। बुखार सहित सामान्य बीमारियों का इलाज भी संभव नहीं, मरीजों को रीवा जैसे जिला मुख्यालयों तक भटकना पड़ रहा है।
















