सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले को रद्द कर दिया है। जानिए मामले से जुड़ी पूरी जानकारी, सबूतों और कोर्ट के फैसले की विस्तार से रिपोर्ट।
पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर वॉर्निंग लेबल लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को अंतिम चेतावनी दी है।
कभी-कभी सरकारी लापरवाही उन परिवारों को भी नहीं बख्शती जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी हो। इसका एक उदाहरण शौर्य चक्र से सम्मानित मोहन सिंह की विधवा का दशकों लंबा संघर्ष है, जिन्हें अपनी हक की स्पेशल फैमिली पेंशन पाने के लिए 26 साल तक इंतजार करना पड़ा और वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया।
पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़ी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित ट्रिब्यूनल के कामकाज की समीक्षा का समय आ गया है।
अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो चुका है, तो निकट भविष्य में आपको पेट्रोल पंप से ईंधन मिलना बंद हो सकता है। सड़कों पर बिना बीमा दौड़ते वाहनों की गंभीर समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के चालान काटे जाएं और उन्हें फ्यूल न देने का नियम लागू किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह यह पक्का करे कि जहां भी सड़क हो, वहां पैदल चलने वालों के लिए ठीक से तय, अतिक्रमण-मुक्त जगह हो। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि पैदल चलने वालों को भरोसा होना चाहिए कि यह जगह उनके लिए है और वे चलती गाड़ियों के किसी भी खतरे के बिना आजादी से चल सकते हैं।
देश की न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर वर्ष 2011 से अब तक 9,800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दशकों से अदालतों में धूल फांक रहे मुकदमों के निपटारे पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है।
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा गरमा गया है। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा-पुलिस को असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे 18 वर्ष से कम उम्र के उन सभी गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करें, जिनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस को इन घटनाओं से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है।
नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ज्यादती के केस में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया है।






















