राजधानी के रिहायशी इलाकों में चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई टल गई है। जज के अवकाश पर होने के कारण कोर्ट की कार्रवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी।

भोपाल नगर निगम अदालत में जमा कर चुका हलफनामा
अब मामले की अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी

भोपाल। स्टार समाचार वेब
राजधानी के रिहायशी इलाकों में चल रहीं व्यावसायिक गतिविधियों पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई टल गई है। जज के अवकाश पर होने के कारण कोर्ट की कार्रवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय होगी। दरअसल, राजधानी के रिहायशी इलाकों में संचालित करीब 62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर आज फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि नगर निगम मामले में अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर चुका है। वहीं रहवासियों ने निगम की इस कार्रवाई को फर्जी बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपने रिकॉर्ड पेश किए हैं।
सीलिंग के बाद थम गई थी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोपाल नगर निगम ने 5 अगस्त से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करना शुरू किया था। करीब 15 दिनों के भीतर सूचीबद्ध 62,500 में से 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद 190 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध और सड़कों पर उतरने के बाद पिछले 15 दिनों से निगम की यह कार्रवाई पूरी तरह रुकी हुई है।

कागजों में सीलिंग, हकीकत में खुली दुकान
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया कि नगर निगम द्वारा अदालत में पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट पर सख्त आपत्ति जताई गई है। रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज जमा कर आरोप लगाया है कि निगम ने पक्षपातपूर्ण और झूठी कार्रवाई की है। जिन दुकानों को सील करने का दावा किया गया था, वे वास्तव में दोबारा खुल चुकी हैं।
मामला पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
यह विवाद भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और कमर्शियल इस्तेमाल से जुड़ा है। अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिली सभी अंतरिम राहतों (स्टे आॅर्डर) को निरस्त कर दिया था। साफ कहा था कि कोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही जांच में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कमर्शियल गतिविधियों से जनता परेशान
स्थानीय निवासियों की मांग है कि रिहायशी क्षेत्रों में सभी व्यावसायिक गतिविधियां तुरंत बंद कराई जाएं। रहवासियों का कहना है कि लगातार बढ़ती भीड़ और शोर से सार्वजनिक शांति भंग हो रही है। तंग गलियों में गाड़ियों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा और हादसों का खतरा बढ़ा है। व्यावसायिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहने लगा है।


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