ईरान-अमेरिका युद्ध के 13वें दिन डोनाल्ड ट्रम्प ने जीत का दावा किया। पेंटागन के मुताबिक 6 दिन में 11.3 अरब डॉलर खर्च हुए। जानें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की 3 शर्तें

वाशिंगटन/तेहरान। स्टार समाचार वेब
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण महायुद्ध अब अपने 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक रैली के दौरान वैश्विक स्तर पर हलचल मचाने वाला बयान दिया है। ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका तकनीकी और सैन्य रूप से ईरान के खिलाफ यह जंग जीत चुका है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक 'मिशन' पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने केंटकी राज्य में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कहा, "जंग के पहले ही घंटे में यह साफ हो गया था कि हम आगे हैं। हमारी जांबाज सेना ने ईरान की सैन्य ताकत और उसके घातक तंत्र को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।" ट्रम्प के इस बयान को ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
जंग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संसद (Congress) को भारी खर्च का ब्यौरा सौंपा है। पेंटागन ने बताया-
कुल खर्च: युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) खर्च कर दिए हैं।
हथियारों पर खर्च: इसमें से 5 अरब डॉलर (लगभग ₹45 हजार करोड़) सिर्फ गोला-बारूद, मिसाइलों और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर खर्च हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध आर्थिक रूप से कितने महंगे साबित हो रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने झुकने के बजाय युद्ध विराम के लिए अमेरिका और इजराइल के सामने तीन कड़ी शर्तें रखी हैं:
कानूनी मान्यता: ईरान के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जाए।
नुकसान की भरपाई: युद्ध के दौरान ईरान को हुए बुनियादी और आर्थिक नुकसान का हर्जाना दिया जाए।
सुरक्षा गारंटी: भविष्य में ईरान पर कभी हमला न होने की पुख्ता अंतरराष्ट्रीय लिखित गारंटी मिले।
ईरान अब भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी शर्तों को मनवाने के लिए अड़ा है, जबकि इजराइल और अमेरिकी सेनाएं ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या डिप्लोमेसी के जरिए यह जंग रुकेगी या खर्च का यह आंकड़ा और ईरान की जिद इसे भीषण तबाही की ओर ले जाएगी।
मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव गहराता दिख रहा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र में स्थित अपने दूतावासों और नागरिकों के लिए हाई सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी उच्च स्तरीय बैठक से पहले अमेरिका ने फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को न्यूयॉर्क आने के लिए वीजा देने से इंकार कर दिया है। अमेरिका के इस फैसले के बाद महासभा में एक विशेष प्रस्ताव लाया गया, ताकि राष्ट्रपति अब्बास वीडियो लिंक के जरिए बैठक को संबोधित कर सकें।
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अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस कानून का आधिकारिक नाम लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट आफ 2026 रखा गया है।
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यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के मक्का, जिद्दा और ताइफ समेत 6 बड़े इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इन हमलों में 13 लोग घायल हुए हैं, जिसके बाद देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

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