अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है। भारत पर लगा 18% आयात शुल्क भी अब हटा लिया गया है। जानें इस फैसले का वैश्विक व्यापार पर क्या असर होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' की आर्थिक नीति को देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए 'ग्लोबल टैरिफ' को असंवैधानिक करार देते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि संविधान के तहत किसी भी प्रकार का टैक्स या आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अंतिम अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के इस्तेमाल को गलत ठहराया, जिसके जरिए उन्होंने व्यापार घाटे को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताकर दुनिया भर के देशों पर भारी आयात शुल्क थोप दिए थे।
इस फैसले के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है, क्योंकि ट्रम्प द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 18% रेसिप्रोकल टैरिफ अब तत्काल प्रभाव से अवैध हो गया है। साथ ही, चीन पर लगा 34% और बाकी दुनिया के लिए तय 10% बेसलाइन टैरिफ भी निरस्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब अमेरिकी खजाने पर भी बड़ा बोझ पड़ सकता है, क्योंकि सरकार को उन कंपनियों को अरबों डॉलर की राशि वापस (Refund) करनी पड़ सकती है, जिनसे पिछले एक साल में यह शुल्क वसूला गया था। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम जैसे विशिष्ट उत्पादों पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे क्योंकि वे अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, लेकिन वैश्विक स्तर पर ट्रम्प की टैरिफ नीति की नींव इस फैसले से हिल गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती आदेश से न केवल अमेरिका में महंगाई कम होने की उम्मीद है, बल्कि भारत, चीन और यूरोपीय देशों के निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे फिर से पहले की तरह खुल जाएंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता आएगी और वैश्विक शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है।
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