दीपावली पर व्यापारियों के लिए लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह पूजा मुख्य रूप से धन की स्थिरता और व्यापार में निरंतर वृद्धि की कामना से व्यावसायिक प्रतिष्ठान (दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री) पर की जाती है।

स्टार समाचार वेब. धर्म डेस्क
दीपावली पर व्यापारियों के लिए लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह पूजा मुख्य रूप से धन की स्थिरता और व्यापार में निरंतर वृद्धि की कामना से व्यावसायिक प्रतिष्ठान (दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री) पर की जाती है। इस पूजन विधि का मुख्य अंतर यह है कि इसमें बही-खातों, तिजोरी (गल्ला) और व्यापारिक उपकरणों की पूजा पर विशेष ज़ोर दिया जाता है, जो पूरे वर्ष के कारोबार का आधार होते हैं।
पूजन का शुभ मुहूर्त और अनिवार्य सामग्री
व्यापारी वर्ग माता लक्ष्मी को स्थिर रखने के लिए अक्सर शुभ और स्थिर लग्न में पूजा करते हैं। शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार तय किए जाते हैं, जिनमें मुख्य रूप से प्रदोष काल (शाम) के दौरान स्थिर लग्न (जैसे वृषभ लग्न या सिंह लग्न) का उपयोग होता है। इसके अलावा, कुछ सिद्धियों के लिए महानिशीथ काल (मध्य रात्रि) भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
अनिवार्य सामग्री: गृहस्थ पूजा सामग्री के साथ, व्यापारियों को नए बही-खाते (या डिजिटल लेजर), तिजोरी/गल्ला, स्याही और दवात (जो काली देवी/सरस्वती के प्रतीक हैं), सिक्के और कौड़ियाँ अवश्य रखनी चाहिए।
पूजा की तैयारी और बही-खाता स्थापना
पूजन से पहले दुकान/ऑफिस की पूर्ण सफाई और शुद्धिकरण किया जाता है। प्रवेश द्वार को फूलों, आम/अशोक के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है।
चौकी स्थापना: पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर चौकी स्थापित की जाती है।
मूर्ति स्थापना: चौकी पर भगवान गणेश (दाईं ओर), देवी लक्ष्मी (मध्य में), देवी सरस्वती और कुबेर देव की मूर्तियाँ/चित्र स्थापित किए जाते हैं।
बही-खाता पूजन: मूर्तियों के सामने नए बही-खाते रखे जाते हैं, जिन पर कुमकुम से स्वास्तिक, शुभ-लाभ और 'श्रीं' चिह्न बनाए जाते हैं। पहले से उपयोग किए जा रहे तिजोरी, कैश काउंटर और अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक उपकरणों को भी पूजा स्थल के पास रखा जाता है।
दीपक: लक्ष्मी जी के बाईं ओर घी का दीपक और दाईं ओर तेल का दीपक जलाया जाता है।
विस्तृत पूजा विधि और मंत्र जाप
व्यापारी पूजन में भी क्रम गृहस्थ पूजा जैसा ही होता है। सर्वप्रथम अपने व्यवसाय का नाम लेकर, व्यापार में वृद्धि और लाभ की कामना करते हुए पूजा का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद, भगवान गणेश और कलश (वरुण देव) का पूजन किया जाता है।
देवी लक्ष्मी पूजन: षोडशोपचार या पंचोपचार विधि से माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उन्हें विशेष रूप से कमल का फूल, खील, बताशे, कौड़ियाँ, हल्दी की गांठ और इत्र अर्पित किया जाता है। व्यापार में स्थिरता के लिए 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद' मंत्र का जाप किया जाता है।
विशेष व्यापारी पूजन: बही-खाता, तिजोरी और कुबेर की आराधना
बही-खाता और कलम पूजन (सरस्वती और काली पूजा): नए बही-खातों और कलम पर स्वास्तिक और शुभ-लाभ बनाकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें अक्षत और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। यह पूजा इसलिए की जाती है ताकि बही-खाते शुद्ध रहें और वर्षभर लाभ के सौदे लिखें।
तिजोरी/गल्ला पूजन (कुबेर पूजा): व्यापार की तिजोरी या गल्ले पर स्वास्तिक बनाया जाता है, धूप-दीप दिखाया जाता है, और उसमें कुछ कौड़ियाँ, कमल गट्टा, हल्दी की गांठ और एक नया सिक्का रखकर पूजा की जाती है। धन की स्थिरता और वृद्धि के लिए कुबेर मंत्र: 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये, धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा' का जाप किया जाता है।
व्यापार उपकरण पूजन: अपने व्यापार से संबंधित उपकरणों (जैसे तराजू, कैश काउंटर, या अन्य मशीनरी) पर कुमकुम लगाकर, धूप-दीप दिखाकर उनकी पूजा की जाती है।

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