सरकार ने WhatsApp और Telegram के लिए सिम बाइंडिंग नियम की समय सीमा तय कर दी है। 1 मार्च 2026 से बिना सक्रिय सिम के नहीं चलेंगे मैसेजिंग ऐप्स।
By: Ajay Tiwari
Feb 26, 20265:13 PM
नई दिल्ली. स्टार समाचार वेब
केंद्र सरकार ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए डिजिटल संचार के नियमों में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, 1 मार्च 2026 से व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) जैसे ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर 'सिम बाइंडिंग' नियम को अनिवार्य कर दिया गया है।
अब महज ओटीपी (OTP) के जरिए लॉग-इन करना पर्याप्त नहीं होगा; आपके डिवाइस में एक्टिव सिम का होना अनिवार्य होगा।
अब तक मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए आपको सिर्फ एक बार ओटीपी की जरूरत होती थी। इसके बाद सिम फोन में हो या न हो, या नंबर बंद ही क्यों न हो जाए, ऐप चलता रहता था। लेकिन सिम बाइंडिंग के तहत:
सक्रिय सिम अनिवार्य: जिस नंबर से व्हाट्सएप बना है, वह सिम उसी फोन में एक्टिव होनी चाहिए।
निरंतर वेरिफिकेशन: ऐप समय-समय पर यह जांच करेगा कि संबंधित सिम फोन में मौजूद है या नहीं।
सिम हटाते ही ऐप बंद: यदि आप फोन से सिम निकाल देते हैं या सिम निष्क्रिय हो जाती है, तो उस डिवाइस पर आपका व्हाट्सएप अकाउंट काम करना बंद कर देगा।
नए नियम केवल मोबाइल तक सीमित नहीं हैं। यदि आप लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web का उपयोग करते हैं, तो अब सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है:
ऑटो लॉग-आउट: डेस्कटॉप वर्जन हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा।
अनिवार्य स्कैनिंग: दोबारा उपयोग के लिए आपको हर बार क्यूआर (QR) कोड स्कैन करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्राइमरी फोन और सिम उपयोगकर्ता के पास ही है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने 28 नवंबर 2025 को इन नियमों की आधारशिला रखी थी। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
साइबर फ्रॉड पर लगाम: फर्जी नंबरों और बिना सिम वाले अकाउंट्स के जरिए होने वाली डिजिटल धोखाधड़ी को रोकना।
फेक प्रोफाइल की पहचान: हर अकाउंट को एक वास्तविक और सक्रिय सिम से जोड़कर स्कैमर्स की पहचान आसान बनाना।
सुरक्षा: गुमशुदा या चोरी हुए फोन के गलत इस्तेमाल को रोकना।