सुशासन और त्वरित समाधान का दावा करने वाली सीएम हेल्पलाइन खुद शिकायतों के बोझ तले दबती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में बुनियादी सुविधाएं इस कदर बदहाल हैं कि प्रदेश का समग्र प्रदर्शन गिरकर डी रेटिंग पर आ गया है।

सीएम हेल्पलाइन में भी नहीं मिल रही हेल्प
प्रदेश के नगरीय निकायों को मिली डी रेटिंग
50 दिन बाद भी नहीं सुलझ रहे जनता के मुद्दे
भोपाल। स्टार समाचार वेब
सुशासन और त्वरित समाधान का दावा करने वाली सीएम हेल्पलाइन खुद शिकायतों के बोझ तले दबती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में बुनियादी सुविधाएं इस कदर बदहाल हैं कि प्रदेश का समग्र प्रदर्शन गिरकर डी रेटिंग पर आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश भर से दर्ज होने वाली हर आठवीं शिकायत अकेले राजधानी भोपाल से आ रही है। भोपाल सबसे आगे है, जहां से प्रदेश की कुल शिकायतों की 12.5 फीसदी फाइलें दर्ज हुईं। 50-50 दिनों तक शिकायतों का समाधान न होना यह साबित करता है कि साफ-सफाई और सीवेज जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी अधिकारियों की सुस्ती बरकरार है। जुलाई 2026 के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि सफाई, सड़क, सीवेज और पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए आम जनता को अब भी दफ्तरों के चक्कर काटने और हेल्पलाइन का सहारा लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
निकायों से 51,610 शिकायतें दर्ज
प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जुलाई 2026 में सीएम हेल्पलाइन पर नगरीय निकायों से संबंधित 51,610 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 44,126 शिकायतों का निराकरण ग्रेडिंग अवधि तक नहीं हो सका, जबकि 10,136 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। प्रदेश का औसत स्कोर 54.54 रहा, जिसके आधार पर समग्र प्रदर्शन को डी रेटिंग मिली है।
भोपाल प्रदेश में पहले स्थान पर
सीएम हेल्पलाइन में पहुंची शिकायतों की बात करें तो इस मामले में भोपाल प्रदेश में पहले स्थान पर है। राजधानी में सबसे अधिक 6,469 शिकायतें दर्ज हुईं, जो प्रदेशभर में प्राप्त शिकायतों में से 12.5 प्रतिशत रही, यानी प्रदेश की हर आठवीं शिकायत राजधानी से दर्ज हुई। भोपाल में 3,170 शिकायतें ग्रेडिंग अवधि में लंबित रहीं, जबकि 916 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। कुल 4,086 शिकायतों का निराकरण अभी बाकी है।
ग्वालियर, उज्जैन-जबलपुर भी आगे
इसके अलावा ग्वालियर में 5,009, इंदौर में 4,699, जबलपुर में 3,829 और उज्जैन में 1,906 शिकायतें दर्ज हुईं। शिकायत निवारण के प्रदर्शन के आधार पर भोपाल को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला है। इससे मालम होता है कि शहर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों में असंतुष्टि है। इनमें ज्यादातर शिकायतें साफ-सफाई और सीवेज व्यवस्था को लेकर आईं हैं।


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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास बीती देर रात एक अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए। हादसा लगभग 1:30 बजे छिनोर की तरफ से आने वाली सड़क पर हुआ।
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