
नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

बड़वानी। स्टार समाचार वेब
नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने आज यानी सोमवार को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नर्मदा नदी में 30 से अधिक नावों के साथ नाव रैली निकाली। वहीं नर्मदा नदी में नाव में सवार होकर मेधा पाटकर ने कहा-नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र किया जाएगा। यह नाव रैली सरकार और प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित मछुआरा समुदाय की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई । इसके बाद मछुआरा संगठनों ने बड़वानी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ठेकेदारी से दिलाई जाए मुक्ति
ज्ञापन में सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुरूप अधिकार देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई है। इसमें प्रस्तावित नर्मदा मत्स्य सहकारी उत्पादन व विपणन संघ के पंजीकरण, विस्थापित मछुआरों को पुनर्वास लाभ, आवास और आजीविका उपलब्ध कराने मत्स्य व्यवसाय को ठेकेदारी से मुक्त कर सहकारी समितियों को सौंपने की मांग शामिल है।
मछुआरों को मिले किसान का दर्जा
आंदोलनकारियों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन, जलस्तर में लगातार गिरावट से मत्स्याखेट पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव, मछुआरों को किसान का दर्जा, केसीसी कार्ड, बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाने और पुलिस-प्रशासन द्वारा कथित उत्पीड़न के मामलों पर त्वरित कार्रवाई की भी मांग की। कुल मिलाकर ज्ञापन में 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए।


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