सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की बेंच 7 अप्रैल-2026 से धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के भेदभाव के मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी। इस मामले में प्रमुख रूप से केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी पक्ष अपनी लिखित दलीलें 14 मार्च तक जमा करें।
By: Arvind Mishra
Feb 16, 20262:12 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की बेंच 7 अप्रैल-2026 से धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के भेदभाव के मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी। इस मामले में प्रमुख रूप से केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी पक्ष अपनी लिखित दलीलें 14 मार्च तक जमा करें। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करते हैं। बेंच में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील परमेश्वर और शिवम सिंह को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया है, ताकि न्यायालय को आवश्यक मार्गदर्शन और पक्षों की दलीलों का विश्लेषण प्रदान किया जा सके।
22 अप्रैल तक आएगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सुनवाई 22 अप्रैल तक पूरी की जाएगी। सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करने वाले पक्षों के लिए कृष्ण कुमार सिंह को नोडल काउंसल नियुक्त किया गया है, जबकि फैसले का विरोध करने वालों के लिए शश्वती परी को नोडल काउंसल बनाया गया।
सियासी हलचल
विपक्षी कांग्रेस का कहना है कि सरकार को अदालत में जाने से पहले जनता को अपना रुख साफ-साफ बताना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर अब तक असमंजस की स्थिति में है।