अमेरिकी शोधकर्ताओं ने विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने एआई का इस्तेमाल करके बिल्कुल नए वायरल डिजाइन तैयार किए हैं, जो लैब के भीतर अपनी कॉपी बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने बायो-सुरक्षा पर जताई चिंता
प्रयोग में कामयाबी, ई-कोलाई बैक्टीरिया को किया ढेर
वाशिंगटन। स्टार समाचार वेब
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने एआई का इस्तेमाल करके बिल्कुल नए वायरल डिजाइन तैयार किए हैं, जो लैब के भीतर अपनी कॉपी बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह पहली बार है जब जेनरेटिव एआई का उपयोग करके किसी पूरे जीनोम को सफलतापूर्वक डिजाइन किया गया है। वहीं पीएचडी छात्र सैमुअल किंग ने कहा-जब पेट्री डिश पर साफ स्पॉट दिखे, तो हम समझ गए कि फेज सही से काम कर रहे हैं। यह एक बेहद रोमांचक पल था और परिणाम देखते ही पूरी लैब तालियों से गूंज उठी।
एआई के दो नए मॉडल
शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च के लिए ईवीओ-1 और ईवीओ-2 नाम के दो एआई मॉडल विकसित किए हैं। ये मॉडल चैटजीपीटी की तरह ही कार्य करते हैं, लेकिन शब्दों के स्थान पर जीवन के मूल आधार यानी डीएनए सीक्वेंस का अनुमान लगाते हैं।
इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता
एआई को वायरस, बैक्टीरिया, पौधों और इंसानों के जेनेटिक कोड पर ट्रेन किया गया और फिर इसे बैक्टीरियोफेज बनाने के लिए रिफाइन किया गया। बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो केवल खास बैक्टीरिया को संक्रमित कर उन्हें नष्ट करते हैं, इनसे इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
ई-कोलाई बैक्टीरिया को किया ढेर
स्टैनफोर्ड की टीम ने एआई द्वारा तैयार 302 सबसे बेहतरीन डिजाइनों को चुना और उन्हें लैब में बनाया। इनमें से 16 बैक्टीरियोफेज खतरनाक ई. कोलाई बैक्टीरिया को खत्म करने में पूरी तरह सफल रहे।
विज्ञान के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट
एक्सपर्ट्स इस शोध को मॉडर्न साइंस का एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रहे हैं। प्रो. ब्रायन ही के अनुसार, इससे उन इन्फेक्शंस का इलाज संभव हो सकेगा जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक्स दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। इस तकनीक से नई दवाएं, एडवांस्ड थेरेपी और कई जेनेटिक बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है।
रिसर्चर्स ने बरती पूरी सावधानी
जोखिम को देखते हुए शोधकर्ताओं ने शुरुआत से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। एआई को ऐसे किसी वायरस पर ट्रेन नहीं किया गया जो इंसानों को संक्रमित कर सके। सारा काम सिर्फ बैक्टीरियोफेज पर और केवल सुरक्षित लैब वातावरण में ही किया गया। अभी एआई केवल 5,400 बेस पेयर वाले छोटे फेज ही बना सका है। हालांकि एआई की यह क्षमता अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे सिंथेटिक बायोलॉजी के एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं।
बायो-सेफ्टी और सुरक्षा पर बड़ा खतरा
इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही बायोसेफ्टी और बायोसिक्योरिटी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों ने सख्त चेतावनी दी है कि इंसान या जानवरों में बीमारी फैलाने वाले खतरनाक वायरस को एआई से डिजाइन करने की कोशिश बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
इनका कहना है
अब सवाल यह नहीं है कि एआई नया वायरस बना सकता है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या इसका इस्तेमाल किसी बड़े नुकसान के बिना किया जा सकता है।
-डॉ. थॉमस इंगल्सबी एवं डॉ. मोरिट्ज हैंके, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी


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