मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि! एम्स भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर। अब बिना चीर-फाड़ के हाई-रिजॉल्यूशन स्कैनिंग से होगा पोस्टमॉर्टम। जानें कैसे काम करती है यह तकनीक।

शव की जांच के लिए सर्जिकल प्रक्रिया की जगह हाई-रिजॉल्यूशन स्कैनिंग का उपयोग होगा।
मौत के कारणों का विश्लेषण करने के लिए अंगों और रक्त प्रणाली की 3D तस्वीरें ली जाएंगी।
पारंपरिक पोस्टमॉर्टम के घंटों के मुकाबले मात्र 30 मिनट में प्रक्रिया पूरी होगी।
डेटा को डिजिटल रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, जो कोर्ट में साक्ष्य के काम आएगा।
संक्रामक बीमारियों के मामलों में डॉक्टरों और स्टाफ के लिए यह तकनीक अधिक सुरक्षित है।
शव की अखंडता बनाए रखते हुए बिना किसी क्षति के परिजनों को सौंपा जा सकेगा।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल फॉरेंसिक मेडिकल जांच के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने के लिए तैयार है। एम्स (AIIMS) भोपाल में प्रदेश का पहला वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर स्थापित होने जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इस आधुनिक तकनीक के आने के बाद अब पोस्टमॉर्टम के लिए शव की पारंपरिक चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, हाई-रिजॉल्यूशन सीटी स्कैन और अत्याधुनिक 3-डी इमेजिंग तकनीक के जरिए शरीर के आंतरिक अंगों की सूक्ष्म जांच की जाएगी। यह सुविधा अब तक केवल जापान जैसे विकसित देशों और भारत के कुछ ही संस्थानों में उपलब्ध थी, लेकिन अब भोपाल भी इस विशिष्ट सूची में शामिल होने जा रहा है।
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वर्चुअल ऑटोप्सी न केवल समय बचाती है, बल्कि न्याय प्रक्रिया के लिए ठोस साक्ष्य भी प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक सटीक है। इसमें मृत्यु के कारणों, जैसे कि रक्त वाहिकाओं में रुकावट या आंतरिक चोटों को डिजिटल रूप में 3D इमेज के जरिए रिकॉर्ड किया जा सकता है। यह डेटा वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिसे भविष्य में कानूनी जरूरत पड़ने पर कोर्ट में डिजिटल एविडेंस के तौर पर पेश करना आसान होगा। सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों के मामलों में यह तकनीक मेडिकल स्टाफ को संक्रमण के खतरे से भी सुरक्षित रखती है।
सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से यह तकनीक एक वरदान साबित होगी। अक्सर परिजन पोस्टमॉर्टम के दौरान होने वाली चीर-फाड़ का विरोध करते हैं, जिससे अस्पताल प्रबंधन के साथ विवाद की स्थिति बनती है। वर्चुअल ऑटोप्सी में शरीर को बिना किसी क्षति के सम्मानजनक स्थिति में परिजनों को सौंपा जा सकेगा। इसके अलावा, जहाँ पारंपरिक प्रक्रिया में कई घंटे लगते थे, वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी मात्र 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। वर्तमान में इस परियोजना का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के पास है और फंड जारी होते ही एम्स भोपाल में इसका संचालन शुरू हो जाएगा।

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