अजय सिंह राहुल की राजनीतिक यात्रा ने मध्यप्रदेश में हलचल बढ़ाई है। क्या यह पहल कांग्रेस को विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल में फिर मजबूत कर पाएगी, इसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
कांग्रेस के कद्दावर नेता व प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल इन दिनों सुर्खियों में हैं। हमेशा अपनी बेवाक कार्यशैली और स्पष्टवादिता के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष इस बार अपनी राजनीतिक यात्रा को लेकर चर्चा के केन्द्र में हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष की राजनीतिक यात्रा ने प्रदेश का राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। सत्तारूढ़ दल भाजपा हो या फिर स्वयं कांग्रेस दोनों ही दलों में इस यात्रा को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हर कोई इस यात्रा का अपने-अपने हिसाब से मतलब निकाल रहा है। कोई इसे कांग्रेस के अंदर चल रहे आंतरिक खींचतान का नतीजा मान रहा है, तो कोई इसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहा है। हालांकि अजय सिंह राहुल ने अपनी इस यात्रा को लेकर साफ कहा है कि इसके कोई सियासी मायने नहीं हैं। यह सिर्फ एक मेल-मिलाप यात्रा है। इस यात्रा के जरिए वे अपने पिता जी के पुराने साथियों से मिल रहे हैं और नए लोगों (युवाओं) को कांग्रेस की रीति- नीति से अवगत कराकर उन्हें पार्टी के साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्वालियर चंबल की चार दिनों की यात्रा के बाद बुंदेलखंड में पांच दिनों तक निकाली गई इस यात्रा को भले ही निजी और मेल मिलाप वाली यात्रा बताया जा रहा हो लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और देश की राजनीति के चाणक्य स्व. कुंवर अर्जुन सिंह के बेटे और सात बार के विधायक यदि किसी यात्रा पर निकले तो उसके सियासी मायने तो निकाले ही जाएंगे? यात्रा के मायने क्या हैं? इन यात्राओं का विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को क्या फायदा मिलेगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इस बात की चर्चा जरूर राजनीतिक हलकों में तेज हो गई है कि क्या अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस का राजनीतिक वैभव पूर्व नेता प्रतिपक्ष की यह यात्रा विंध्य, ग्वालियर-चम्बल एवं बुंदेलखंड में वापस ला पाएगी?
2018 में भी निकाली थी यात्रा
प्रदेश में सुस्त पड़े कांग्रेसियों में जोश भरने निकले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी प्रदेश भर में राजनीतिक यात्रा निकाली थी और उस दौरान चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी भी थी, यह बात अलग है कि बाद में सरकार गिर गई थी। उस समय भी अपनी राजनीतिक यात्रा पर निकले चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल ने कांग्रेस की सरकार न बनने तक माला न पहनने का संकल्प लिया था।
2028 में सरकार बनाने का दावा
2018 की तरह ही 2028 में कांग्रेस की सरकार बनाने का संकल्प लेकर राजनीतिक यात्रा पर निकले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने इस बार भी माला और साफा सरकार बनने तक न पहनने का प्रण लिया है। 2028 के चुनाव में सरकार बनने और उसके पांच साल तक चलने का दावा पूर्व नेता प्रतिपक्ष द्वारा किया जा रहा है।
पांच संभाग, 23 जिला, 90 सीटें कांग्रेस के पास मात्र 26
विंध्य, बुंदेलखंड एवं ग्वालियर- चंबल संभाग कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है लेकिन आज इन्ही क्षेत्रों कांग्रेस सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। अगर विंध्य, ग्वालियर- चंबल और बुंदेलखंड में कांगे्रस की मौजूदा स्थिति की बात की जाए तो यहां 5 संभाग (रीवा, शहडोल, सागर और ग्वालियर- चंबल) में 23 जिले आते हैं, इन जिलों में 90 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 26 सीटें ही मिली हैं जिनमें विंध्य में 30 में से 5, बुंदेलखण्ड क्षेत्र में 26 में से 5 और ग्वालियर- चंबल में 34 सीटों में से 16 सीटें कांग्रेस को मिली थी। जबकि 2018 में इन्हीं पांच संभागों में 38 सीटें कांग्रेस के पास थीं। ग्वालियर- चंबल में फिलहाल कुछ हद तक कांग्रेस अभी भी भाजपा से लड़ाई में है जबकि विंध्य और बुंदेलखंड में तो कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है, ऐसे में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की ये यात्राएं कांग्रेस के नेताओं में एक नया जोश भरने का काम करेंगी।
विंध्य के बाद दूसरे क्षेत्रों में बढ़ाई सक्रियता
कांग्रेस में ही अपनी एक अलग राह की तलाश में निकले पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने विंध्य के अलावा अब दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी। अपनी इस सक्रियता की शुरूआत श्री सिंह ने चंबल-ग्वालियर अंचल के चार दिवसीय दौरे से की जहां उन्होने 11 से 15 मार्च तक ग्वालियर, मुरैना, दतिया और भिंड का दौरा किया। इन जिलों में कई ऐसी सीटें हैं जिन्हें काफी अंतरों से कांग्रेस हारी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल इन क्षेत्रों के पुराने कांग्रेसी जो किन्ही कारणों से घर बैठे हैं उन्हें फिर से जमीन में सक्रिय करने में जुटे हैं। ग्वालियर - चंबल के बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बुंदेलखंड की भी यात्रा की और यहां पुराने कांगे्रसियों से मिले। गौरतलब है कि ग्वालियर- चंबल हो फिर बुंदेलखंड यहां के कई कद्दावर कांग्रेसी कुंवर अर्जुन सिंह के जमाने से अजय सिंह से जुड़े रहे हैं,लेकिन पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रीसिंह विंध्य क्षेत्र को छोड़कर बुन्देलखंड में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। मध्य प्रदेश गठन के पहले बुन्देलखंड भी विंध्य प्रदेश में ही शामिल था। अब अजय सिंह ने इस क्षेत्र में कांग्रेसियों के घर-घर जाकर सम्पर्क किया है। उनके इस सम्पर्क से कांग्रेस को कितना फायदा होगा यह तो आने वाले विधानसभा चुनाव में पता चलेगा लेकिन एक बात तो तय है कि लम्बे समय से हासिए पर चल रहे वरिष्ठ कांग्रेसियों में अजय सिंह राहुल की यात्रा ने एक नया जोश जरूर भर दिया है अब जरूरत इस बात की है कि यह जोश और उत्साह विधानसभा चुनाव तक बना रहे।
पार्टी के जनाधार वाले नेताओं में एक हैं
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल प्रदेश के उन चंद नेताओं में से एक हैं जिनका अपना एक अलग जनाधार है, वे किसी एक विधानसभा तक सीमित नहीं है, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि श्री सिंह की राजनीतिक यात्रा में इतना जनसैलाब उमड़ा जितना कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक जनसभाओं में इन दिनों नजर नहीं आ रहा है। वैसे भी विंध्य हो या समूचा प्रदेश जब-जब अजय सिंह राहुल को राजनीतिक रूप से किनारे लगाने का प्रयास किया गया है। तब -तब वे राजनीतिक रूप से और सशक्त होकर मैदान में लोगों के बीच सामने आए हैं।
विंध्य क्षेत्र
जिला सीट कांग्रेस
सतना 05 01
मैहर 02 01
रीवा 06 01
मऊगंज 02 00
सीधी 04 01
सिंगरौली 03 00
शहडोल 03 00
अनूपपुर 03 01
उमरिया 02 00
बुंदेलखंड क्षेत्र
सागर संभाग
जिला सीट कांग्रेस
सागर 08 01
छतरपुर 06 01
दमोह 04 00
टीकमगढ़ 03 02
पन्ना 03 00
निवाड़ी 02 01
ग्वालियर - चंबल संभाग


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