गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्षी दलों को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना निंदनीय है और विपक्ष को सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए।
By: Ajay Tiwari
Mar 11, 20265:37 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
लोकसभा में आज गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने संसदीय परंपराओं, नियमों और मर्यादा का हवाला देते हुए कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है और अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है।
अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत सदन की गरिमा से की। उन्होंने कहा कि सदन की भावना और दीर्घकालिक परंपरा आपसी विश्वास पर टिकी होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह विश्वास ही लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा, "विपक्ष ओम बिरला को मर्यादा न सिखाए।" शाह ने याद दिलाया कि जब से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, उन्होंने नैतिकता का परिचय देते हुए स्वयं चेयर पर बैठना छोड़ दिया। यह उनकी महानता और नियमों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
गृह मंत्री ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सदन नियमों और संसदीय भाषा से संचालित होता है, लेकिन कुछ सदस्य इस बुनियादी बात को समझने को तैयार नहीं हैं। शाह ने कहा स्पीकर को अधिकार है कि वे असंसदीय शब्दों को रिकॉर्ड से हटाएं। यदि कोई सदस्य मर्यादा लांघता है, तो अध्यक्ष उन्हें टोकने, निष्कासित करने या निलंबित करने का पूर्ण अधिकार रखते हैं। अमित शाह ने गर्व से कहा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने कभी भी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सदन की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचाई।
अमित शाह ने संसद में विपक्षी महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री की चेयर के घेराव के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "आप प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं, तो लाइये, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। लेकिन अध्यक्ष को निशाना बनाना गलत है।" उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने के गिने-चुने उदाहरण हैं, जो संसदीय राजनीति के लिए अफसोसजनक हैं।
अमित शाह ने भावुक होते हुए कहा कि करीब चार दशक बाद ऐसी स्थिति बनी है जब लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है।
"जब आप अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल खड़े करते हैं, तो इससे ज्यादा निंदनीय कुछ नहीं हो सकता। स्पीकर सदन के संरक्षक होते हैं, वे किसी एक दल के प्रतिनिधि नहीं होते।"