बहुचर्चित अरहर (राहर) घोटाले की फाइल एक बार फिर खुल गई है। रीवा के आंचलिक कार्यालय के ऑडीटर ने सतना मंडी से दस्तावेज एकत्र किए। विभागीय जांच में मंडी शुल्क चोरी, अवैध खरीदी और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की परतें उभर सकती हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
तकरीबन चार साल पहले हुए बहुचर्चित अरहर (राहर) घोटाला कांड का जिन्न एक बार पुन: फाइलों से बाहर आ गया है। जिस अरहर खरीदी की अनियमितताओं पर विभागीय अधिकारियों ने ऐन-केन- प्रकारेण पर्दा डाल रखा था उसकी फाइल एक शिकायत के बाद पुन: खुल गई है। कृषि उपज मंडी के आंचलिक कार्यालय रीवा के अधिकारियों ने इस मामले की उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। गुरुवार को रीवा कार्यालय से सतना आए आॅडीटर ने मूल अभिलेखों को एकत्र करने की कार्रवाई की।
ऑडीटर ने एकत्र किए अभिलेख
गुरुवार को सतना कृषि उपज मंडी पहुंचे आंचलिक कार्यालय रीवा के ऑडीटर रत्नेश सिंह ने इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को एकत्र करने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान उन्होंने मंडी सचिव करुणेश तिवारी से भी चर्चा की और दस्तावेज उपलब्ध कराने का आग्रह किया। बताया जाता है कि ऑडीटर ने संबंधित दस्तावेज एकत्र कर लिए हैं जिनका सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद उच्चाधिकारियों को प्रतिवेदन सौंपा जाएगा। माना जा रहा है कि यदि सूक्ष्मता से जांच हुई तो पंकज सिंह व विमल तिवारी के अलावा भी मंडी के कुछ अधिकारी-कर्मंचारी की गर्दन जांच के दायरे में आ सकती है।
क्या है मामला
विभागीय जानकारों ने बताया कि मामला 2021-22 और 2022-23 में की गई अरहर खरीदी से जुड़ा है। मझगवां मंडी के किसानों से इस दौरान चेटूमल एंड सन्स फर्म ने मंडी के नियमों का उल्लंघन करते हुए क्षेत्रीय किसानों से कई ट्रक अरहर की खरीदी की थी। मंडी कर्मचारियों व क्षेत्रीय व्यापारियों से सांठगांठ कर की गई अरहर खरीदी का मामला खुल गया था। इस दौरान भारी मात्रा में मंडी शुल्क की चोरी का मामला भी उस दौरान प्रकाश में आया था। पोल जैसे ही खुली वैसे ही अरहर खरीदी व बिक्री को वैध करने की कवायदें शुरू हो गर्इं जिसमें उस दौरान मंडी के निरीक्षक व अधिकारियों ने संदिग्ध भूमिका निभाई थी। बाद में सौदा पत्रकों को हथियार बनाकर अरहर खरीदी को वैध करने का प्रयास हुआ। हालांकि जब मामला उच्च स्तर पर पहुंचा तो आनन- फानन सहायक निरीक्षक पंकज सिंह और सहायक उप निरीक्षक विमल तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन कृषि संचालक रीवा एचआर लाहरिया ने रहस्यमयी तरीके से पुन: जांच कराई और लीपापोती कर मामले को दबा दिया। नतीजतन सस्पेंड किए गए पंकज सिह व विमल तिवारी बहाल हो गए। इनमें से पंकज सिंह अभी भी मंडी का काम देख रहे हैं जबकि विमल तिवारी ने मंडी की नौकरी को छोड़ दिया है और नगर निगम इंदौर में कार्यरत हैं।
बीते दिनों तलब किए गए थे अभिलेख
21 अगस्त को संयुक्त संचालक म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड आंचलिक कार्यालय रीवा से मंडी सचिव को जारी हुए पत्र में कई अभिलेख मांगे गए थे जिनमें वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक कृषि उपज मंडी सतना एवं उप मंडी मझगवां के आय तथा आवक की जिन्सवार तुलनात्मक जानकारी प्रमुख थी। इसके अलावा उप मंडी मझगवां क्षेत्र अन्तर्गत मंडी समिति द्वारा तैनात मंडी निरीक्षक एवं सहायक उप निरीक्षकों के कार्य आवंटन आदेशों की प्रमाणित प्रति के साथ उप मंडी मझगवां के अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में अधिसूचित कृषि उपज अरहर के किए गए व्यवहारिक समव्यवहार में जारी अनुज्ञा पत्रों की सूची भी विवरण सहित मांगी गई थी।
लगी थी मंडी को राजस्व की चपत
विभागीय जानकारों के अनुसार अरहर खरीदी के मामले में मंडी को खासी चपत राजस्व की लगी थी। जानकारों के अनुसार कुल खरीदी का एक फीसदी मंडी शुल्क वसूलने का प्रावधान है लेकिन यदि नियम विरुद्ध खरीदी की जाए तो यही मंडी शुल्क पांच गुना पेनाल्टी के साथ वसूलने का नियम है। बताया जाता है कि अरहर खरीदी में गफलत का मामला सामने आने के बाद भी सौदा पत्रक के जरिए मंडी शुल्क की चोरी को छिपाने का प्रयास किया गया जिससे मंडी को क्षति पहुंची। अब उच्च अधिकारी इसी की जांच कर रहे हैं।
आई राशि तो किसानों के चेहरे में छाई मुस्कान
अंतत: जिले में पहली बार समर्थन मूल्य पर मूंग बेंचने वाले किसानों के चेहरे पर मुस्कान छा ही गई। दरअसल, जिन किसानों का भुगतान नहीं हो पाया था उनका भुगतान खरीदी बंद होने के 20 दिन बाद हो गया है। गौरतलब है कि सतना व मैहर जिले में पहली बार तीन खरीदी केन्द्रों के जरिए कुल 363 किसानों से मूंग खरीदने का पंजीयन किया गया था इनमें से रामानुजम विपणन सहकारी समिति रामपुर व सहकारी विपणन समिति उचेहरा सतना जिले में थी जबकि शारदा विपणन सहकारी समिति मैहर जिले में थी। इन तीनों समितियों को तकरीबन 1500 क्विंटल मूंग खरीदी का लक्ष्य दिया गया था लेकिन विभाग ने 2505 क्विंटल मूंग की खरीदी कर ली थी। ऐसे में 1005 क्विंटल मूंग का भुगतान फंस गया था। सूत्रों के अनुसार अतिरिक्त मूंग की खरीदी का भुगतान भी आ गया है, जो जिला मार्कफेड प्रबंधन द्वारा किसानों को दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 8 अगस्त को मूंग की खरीदी बंद हुई थी।

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