सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ FIR दर्ज करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई। जानें इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज विवाद और फर्जी सेल डीड का पूरा मामला।
By: Star News
Mar 10, 202611:45 AM
नई दिल्ली/भोपाल. स्टार समाचार वेब
भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक प्रक्रिया में बड़ी सफलता मिली है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें विधायक के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ खानूगांव स्थित इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ी है। आरोप है कि 'अमन एजुकेशन सोसाइटी', जिसके सचिव आरिफ मसूद हैं, ने कॉलेज की मान्यता और एनओसी (NOC) हासिल करने के लिए कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। उच्च शिक्षा विभाग ने जून 2025 में कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी, जिसे विधायक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों को "कठोर" बताया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष आए बिना ऐसे अंतरिम आदेश देना आवश्यक नहीं था। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने मसूद का पक्ष रखते हुए दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश न्यायिक प्रक्रिया के मानदंडों के विपरीत था।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुख्य मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सभी पक्षों को अपनी दलीलें जल्द पूरी करने को कहा गया है, जिसके बाद हाईकोर्ट तथ्यों और मेरिट के आधार पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।