बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जल्द इस्तीफा देने की चर्चा तेज हो गई है। शेख हसीना की दिसंबर में संभावित वापसी और अदालती फैसलों से देश का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

बांग्लादेश। स्टार समाचार वेब
बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि उनका कार्यकाल अभी लगभग दो साल बाकी है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बाद उनके इस्तीफे की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। यदि ऐसा होता है, तो यह देश के लिए एक और बड़ा राजनीतिक बदलाव होगा, जो ऐसे संवेदनशील दौर में आ रहा है जब देश पहले ही शेख हसीना सरकार के पतन और नई सरकार के गठन के प्रभावों से गुजर रहा है।
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था। वर्ष 2024 के जुलाई-अगस्त में हुए छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के भारत आने और वहीं रहने के बाद भी, शहाबुद्दीन एकमात्र ऐसे शीर्ष पदाधिकारी थे जो उस बड़े बदलाव के बाद भी अपने संवैधानिक पद पर बने रहे।
अब सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति जल्द ही पद छोड़ सकते हैं, हालांकि इसके पीछे का सटीक कारण अभी आधिकारिक तौर पर साझा नहीं किया गया है।
पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरों ने तूल पकड़ा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा सरकार राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के कामकाज से सहज महसूस नहीं कर रही है। प्रमुख अखबार 'प्रोथोम आलो' ने एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र के हवाले से दावा किया है कि सरकार इस बात से खफा है कि राष्ट्रपति ने हाल ही में अपदस्थ नेता शेख हसीना से फिर से संपर्क साधने का प्रयास किया था।
वहीं, 'द डेली स्टार' से बातचीत में बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और शेख हसीना के बीच कथित फोन पर बातचीत ही इस संभावित इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं है। यह मामला उससे कहीं अधिक जटिल है, खासकर तब जब शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की औपचारिक घोषणा कर दी है, जिससे देश का राजनीतिक माहौल अत्यधिक संवेदनशील हो गया है।
इस महीने की शुरुआत में शेख हसीना ने घोषणा की थी कि वह दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगी। बांग्लादेश सरकार ने उनकी वापसी की योजना का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही यह भी कड़े शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि देश लौटने पर उन्हें कानून का सामना करना ही होगा।
उल्लेखनीय है कि 17 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने जुलाई आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों में संलिप्तता के आरोपों पर सुनवाई करते हुए शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। मौजूदा अंतरिम व्यवस्था के दौरान आईसीटी-बीडी कानून में आवश्यक संशोधन भी किए गए थे, जिससे अवामी लीग के नेताओं और अधिकारियों पर मानवता के खिलाफ अपराधों के तहत मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
राष्ट्रपति का संभावित इस्तीफा, शेख हसीना की दिसंबर में प्रस्तावित वापसी और उनके खिलाफ जारी कानूनी कार्यवाहियां बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ले आई हैं। यदि राष्ट्रपति वास्तव में अपने पद से इस्तीफा देते हैं, तो यह देश के मौजूदा राजनीतिक संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालेगा।

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