भोपाल के बड़े तालाब में 20 नए शिकारे शुरू किए गए। सीएम मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। प्रदूषण-रहित तकनीक से बने शिकारे 400 रुपए में 30 मिनट का अनुभव देंगे। जानें पूरी खबर।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोट क्लब पर इन शिकारों को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की
भोपाल. स्टार समाचार वेब
बड़े तालाब में गुरुवार से 20 नए शिकारे उतर गए हैं, जो अब पर्यटकों को श्रीनगर की डल झील जैसा अनुभव देंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोट क्लब पर इन शिकारों को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की और स्वयं भी शिकारा यात्रा का आनंद लिया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहे। अब आम नागरिक भी इन शिकारा राइड्स का मजा ले सकेंगे।

सीएम यादव ने शिकारों की सुविधाओं और डिजाइन की सराहना की। यात्रा के दौरान उन्होंने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता किया। फ्लोटिंग बोट मार्केट से उन्होंने साड़ी और जैकेट भी खरीदी। इस आयोजन में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से केवल नेता प्रतिपक्ष सिंघार ही कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने सरकार के इस कदम की प्रशंसा की।
सरकार का कहना है कि डल झील की तर्ज पर बनाए गए ये शिकारे वॉटर टूरिज्म को नई पहचान देंगे और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। इनका संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन निगम द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक शिकारे में चार यात्री बैठ सकेंगे और 30 मिनट की यात्रा के लिए 400 रुपए शुल्क तय किया गया है। हर शिकारा लगभग 2.40 लाख रुपए की लागत से तैयार हुआ है और सुबह 9 बजे से लेकर सूर्यास्त तक उपलब्ध रहेगा।

भोपाल के बड़े तालाब में एक साथ 20 नए शिकारे शुरू, डल झील जैसा अनुभव।
सीएम मोहन यादव ने शिकारा यात्रा कर फ्लोटिंग मार्केट से सामान खरीदा।
400 रुपए में 30 मिनट की सैर; प्रदूषण-रहित FRP तकनीक से निर्माण।
NGT की रोक के बाद अब केवल पर्यावरण-अनुकूल शिकारे ही चलेंगे।
20 शिकारे आधुनिक, प्रदूषण-रहित ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ (FRP) तकनीक से तैयार किए गए हैं, जो जल में किसी प्रकार के रासायनिक प्रभाव नहीं छोड़ते। इससे तालाब के पर्यावरण और पानी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं होगा। इन शिकारों को उन्हीं विशेषज्ञ संस्थाओं ने तैयार किया है, जिन्होंने केरल, बंगाल और असम में पर्यटक शिकारों का निर्माण किया है। पर्यटक शिकारा सैर के दौरान बर्ड वॉचिंग कर सकेंगे और दूरबीन से आसपास के पक्षियों को देख पाएंगे। इसके साथ ही शिकारे में हैंडीक्राफ्ट, स्थानीय व्यंजन, ऑर्गेनिक फल-सब्जियां और अन्य उत्पाद खरीदने की भी सुविधा होगी। पर्यटन विभाग का उद्देश्य है कि भोपाल को वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाए।
2024 में नगर निगम ने एक शिकारे को परीक्षण के तौर पर चलाया था। अब एक साथ 20 शिकारे तालाब में उतारे गए हैं। लगभग 10 महीने पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बड़े तालाब सहित प्रदेश के तमाम वेटलैंड्स में क्रूज और मोटर बोट पर रोक लगा दी थी। आदेश के अनुसार डीजल इंजन से निकलने वाले प्रदूषक जल को एसिडिक बनाते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य और जलीय जीवों को खतरा होता है। इसी वजह से अब केवल सामान्य, पर्यावरण-सुरक्षित शिकारे ही संचालित किए जा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज यानी सोमवार को निगम-मंडलों के नवनियुक्त पदाधिकारियों के उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का अटल बिहारी वाजपेई सुशासन संस्थान में दीप-प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पदाधिकारियों को उनके प्रशासनिक दायित्वों, वित्तीय प्रबंधन और शासन की नीतियों के प्रति मार्गदर्शन प्रदान करना था।
उत्तर भारत में इन दिनों गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। देश के कई राज्य भीषण गर्मी से तप रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा से लेकर राजस्थान और महाराष्ट्र के कई जिलों में लोगों का गर्मी से बुरा हाल रहा। यूपी का बांदा 46.7 के साथ और एमपी का राजगढ़ जिला 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म शहर रहा।
भोजशाला मामले में MP के पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि ASI को मंदिर के सबूत नहीं मिले। वहीं भोज उत्सव समिति ने दिग्विजय सरकार पर पूजा प्रतिबंधित करने का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर।
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मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के अफसर और कर्मचारियों के अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, वित्त विभाग द्वारा मप्र सिविल सेवा अवकाश नियम 2025 के तहत अवकाश मंजूरी के अधिकारों को विभाजित कर दिया है।
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सुबह से ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखते बन रहा था। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में प्रवेश किया। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे हाथों में मां सरस्वती के चित्र और धार्मिक ध्वज लिए पहुंचे।
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