भोपाल नगर निगम ने आवासीय भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर 400 से अधिक लोगों को नोटिस दिए। वहीं, सामान्य कचरे में बायो-मेडिकल वेस्ट मिलाने पर राजीव नगर के बालाजी अस्पताल पर 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

भोपाल में नियमों को ताक पर रखकर व्यवसायिक गतिविधियां चलाने वालों और शहर की स्वच्छता व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भोपाल नगर निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मंगलवार को निगम ने शहर में दो बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया, जिससे हड़कंप मच गया है।
निगम ने आवासीय परिसरों या भवनों के भीतर अवैध रूप से कमर्शियल गतिविधियां (व्यावसायिक संचालन) चलाने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पिछले दो दिनों के भीतर निगम की टीमों ने ऐसे 400 से ज्यादा लोगों और संचालकों को चिन्हित कर सख्त नोटिस थमाए हैं। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आवासीय क्षेत्रों में कॉमर्शियल गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और यदि तय समय सीमा में इन्हें बंद नहीं किया गया, तो और भी कड़ी सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी बड़ी कार्रवाई वार्ड नंबर-68 स्थित राजीव नगर के बालाजी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर की गई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा खतरनाक बायो-मेडिकल वेस्ट को सामान्य और गीले कचरे के साथ मिलाकर निगम के कचरा वाहन में दिया जा रहा था। यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम (Solid Waste Management Rules) और स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों का खुला उल्लंघन था। इस गंभीर लापरवाही के चलते नगर निगम ने अस्पताल पर 50,000 रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। साथ ही, भविष्य में ऐसी गलती दोहराने पर अस्पताल को पूरी तरह सील करने की अंतिम चेतावनी भी दी गई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब गोविंदपुरा कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर पहुंचने वाले कचरा वाहनों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी। निगम के अधिकारियों ने पाया कि एक वाहन में आए गीले कचरे के साथ बायो-मेडिकल वेस्ट भी मिला हुआ है। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए कचरे का सूक्ष्मता से परीक्षण (बारीकी से जांच) शुरू किया। लगभग तीन घंटे की कड़ी मेहनत और छानबीन के बाद उस स्रोत की पहचान कर ली गई जहां से यह कचरा आया था। जांच में यह साबित हुआ कि यह खतरनाक कचरा 'बालाजी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल' द्वारा ही दिया गया है। निगम की टीम तुरंत कचरा वाहन के साथ सीधे बालाजी अस्पताल पहुंची और अस्पताल प्रबंधन के सामने उस कचरे की शिनाख्त कराई। अस्पताल के कर्मचारियों ने भी स्वीकार किया कि यह कचरा उनके संस्थान का ही है। नियम के अनुसार बायो-मेडिकल वेस्ट को सुरक्षित रूप से इंसीनेटर (भस्मक) के माध्यम से नष्ट किया जाना चाहिए, लेकिन अस्पताल ने लापरवाही बरतते हुए इसे आम किचन वेस्ट के साथ खुलेआम कचरा गाड़ी में डाल दिया था।
इस पूरी घटना के बाद नगर निगम ने अपने कचरा वाहन चालकों को भी कड़ी हिदायत दी है। निगम ने स्पष्ट किया है कि वाहन चालक केवल अलग-अलग (पृथक) किया हुआ गीला और सूखा कचरा ही स्वीकार करें। यदि भविष्य में किसी भी कचरा वाहन में मिक्स कचरा पाया जाता है, तो संबंधित वाहन और उसके चालक के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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