सतना जिला अस्पताल में 24 घंटे में तीन गर्भस्थ शिशुओं की मौत और छह माह में 14 मातृ मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग ने समीक्षा बैठक बुलाई है। उपचार, रेफरल, संसाधनों और व्यवस्थाओं की जांच होगी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल सतना में महज 24 घंटे के भीतर तीन गर्भस्थ शिशुओं की मृत्यु और पिछले छह माह में सामने आई 14 मातृ मृत्यु के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लेते हुए अब प्रत्येक प्रकरण की बारीकी से समीक्षा करने का निर्णय लिया है। 26 सितंबर को सुबह 11 बजे जिला अस्पताल के मीटिंग हॉल में होने वाली समीक्षा बैठक में प्रसूता के अस्पताल पहुंचने से लेकर भर्ती, जांच, उपचार, चिकित्सकीय प्रबंधन, रेफरल और मृत्यु तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी। जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. विजय अरख ने इस संबंध में सिविल सर्जन सतना डॉ. अमर सिंह और सिविल सर्जन मैहर डॉ. एसबी अवधिया को पत्र भेजा है। संबंधित विभागाध्यक्षों और प्रसूति विभाग के चिकित्सकीय अमले को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सतना तथा मेडिकल कॉलेज सतना के अधिष्ठाता करेंगे।
भर्ती से परिणाम तक खंगाली जाएगी पूरी प्रक्रिया
समीक्षा बैठक में केवल मृत्यु के कारणों तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक प्रकरण में उपचार की पूरी श्रृंखला को देखा जाएगा। प्रसूता कब अस्पताल पहुंची, किस स्थिति में भर्ती हुई, कौन-कौन सी जांच कराई गईं, उपचार कब और किस स्तर पर शुरू हुआ, चिकित्सकीय निर्णय क्या रहे, रेफरल की जरूरत कब महसूस हुई और रेफरल के बाद क्या कार्रवाई हुई—इन सभी बिंदुओं पर केस फाइल और केस शीट के आधार पर समीक्षा होगी। मेटरनिटी विंग के विभागाध्यक्ष और यूनिट प्रभारी अपनी-अपनी यूनिट से संबंधित मातृ मृत्यु के प्रकरणों की केस फाइल, केस शीट और अन्य अभिलेख लेकर बैठक में उपस्थित होंगे।
इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों की पहचान और उपचार में कहीं देरी तो नहीं हुई तथा उपलब्ध संसाधनों का समय पर उपयोग किया गया या नहीं।
दवा, उपकरण और जांच सुविधाएं भी जांच के दायरे में
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा केवल चिकित्सकीय निर्णयों तक सीमित नहीं रहेगी। मानव संसाधन की उपलब्धता, आवश्यक दवाओं, चिकित्सकीय उपकरणों, जांच सुविधाओं और अन्य जरूरी संसाधनों की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। यानी यदि किसी मामले में उपचार में बाधा का कारण संसाधनों की कमी सामने आती है तो उसकी भी पहचान की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा का उद्देश्य किसी व्यक्ति या विभाग को सीधे दोषी ठहराना नहीं, बल्कि ऐसी कमियों को चिन्हित करना है जिनके कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद चिन्हित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
2030 तक मातृ मृत्यु दर 70 करने का लक्ष्य
17 सितंबर को भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक द्वारा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आयोजित कार्यशाला में भी मातृ मृत्यु दर कम करने पर विशेष जोर दिया गया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु दर 87 और मध्यप्रदेश में 135 प्रति एक लाख जीवित जन्म दर्ज है। वर्ष 2030 तक इसे घटाकर 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में सतना जिले में छह माह के भीतर सामने आई 14 मातृ मृत्यु और एक ही दिन में तीन गर्भस्थ शिशुओं की मृत्यु के मामलों की समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समीक्षा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मौतों के पीछे मरीजों की गंभीर स्थिति कितनी जिम्मेदार थी और स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था में किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
अब हर सप्ताह होगी मातृ-शिशु मृत्यु की समीक्षा
स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु मृत्यु की समीक्षा को नियमित प्रक्रिया बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। अगले माह से पूर्व निर्धारित साप्ताहिक दिवस पर संस्थागत मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए जाएंगे। इन बैठकों में सामने आने वाली कमियों के निराकरण की स्थिति की भी निगरानी होगी। जहां आवश्यक संसाधनों की कमी सामने आएगी, वहां संबंधित प्रस्ताव तैयार कर आगामी जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर के समक्ष रखे जाएंगे।


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