SEO विवरण (Description): संसद से 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' पारित हो गया है। जानिए 2 साल से अधिक देरी पर नए नियम, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की भूमिका और फर्जीवाड़े रोकने के उपायों के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से।

केंद्र सरकार ने देश में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सख्त और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्यसभा में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है। इससे पहले यह महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा से भी बिना किसी बहस के पास हो चुका था।
जुलाई 2026 के अंत में संसद में पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 1969 के मूल अधिनियम में समय के अनुकूल बदलाव लाना है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया जा सके और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
नए संशोधन के तहत जन्म या मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में होने वाली देरी के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया गया है। समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए इसमें पुराने प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
पुराना नियम:
पहले यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से अधिक समय तक नहीं कराया जाता था, तो इसके लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अनुमति पर्याप्त होती थी।
नया नियम:
अब यदि रजिस्ट्रेशन में 2 वर्ष से अधिक का विलंब होता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आधिकारिक आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।
2 साल तक की देरी के मामले:
यदि पंजीकरण में 2 साल तक की देरी होती है, तो पुराने नियमों के आधार पर ही निर्धारित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मंजूरी दी जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि आज के दौर में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र महज एक सामान्य कागज नहीं रह गए हैं। स्कूल में दाखिला लेने, पासपोर्ट बनवाने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और संपत्ति के विवाद निपटाने में इन दस्तावेजों की सबसे अहम और निर्णायक भूमिका होती है।
कई बार लोग जन्म तिथि में हेरफेर करने या संपत्ति के दावों को प्रभावित करने के लिए वर्षों बाद फर्जी बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट बनवा लेते थे। नए और कड़े नियमों के लागू होने से इस तरह की धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों के अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगेगी।
यह संशोधन बिल आधुनिक कानूनी ढांचे के अनुरूप परिभाषाओं को अपडेट करता है। इसके तहत पुरानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1973) के पुराने संदर्भों को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके स्थान पर नए लागू हुए 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' के प्रावधानों के अनुसार "एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट" जैसे शब्दों को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है।
संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह नया कानून 'जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन (संशोधन) एक्ट, 2026' के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल की हरी झंडी और संसद की मुहर के बाद, अब केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करने की निर्धारित तिथि से यह पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने आईआईटी दिल्ली के कार्यक्रम में भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की रूपरेखा साझा की है। गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2028) और 2040 तक चांद पर मानव भेजने से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
बीजेपी के पूर्व सांसद हरनाथ सिंह यादव ने SC/ST कानून के दुरुपयोग को रोकने और OBC-General के सम्मान की बात कही है। साथ ही उन्होंने आरक्षित वर्गों में क्रीमी लेयर को बाहर करने की मांग उठाई है।
दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत पर रिहा कर दिया है। जानें क्या है पूरा मामला और क्यों नहीं लगा UAPA
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी का देशव्यापी प्रदर्शन। बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर याचिकाएं दायर। जानिए इस विवाद से जुड़े सभी ताजा अपडेट्स।
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की जनहित याचिका खारिज कर दी है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे बदलाव चरणबद्ध तरीके से होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर की प्रेरक यात्रा पर निकले युवाओं के दल से खास संवाद किया। इस दौरान युवाओं ने रास्ते में मिले जन-आशीर्वाद, जमीनी अनुभवों और सेवा कार्यों की अपनी अनूठी कहानियों को प्रधानमंत्री के साथ साझा किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीआई भुगतान पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इससे मिलने वाली राशि भारत सरकार के समेकित कोष में नहीं जाती।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव आयोग में मतभेद और फॉर्म-6 में बदलाव के दावों को खारिज किया। साथ ही राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। पढ़ें पूरी खबर विस्तार से।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी और चुनावी धांधली के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में एंटी इनकंबेंसी का नियम बीजेपी पर लागू क्यों नहीं होता? जानिए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की सभी बड़ी बातें।
नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर के पास बुधवार रात एक चलती स्लीपर AC बस में आग लगने से 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। बस दिल्ली से महोबा जा रही थी।