मझगवां स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी की कार्यशैली को लेकर मीडियाकर्मियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। मीडियाकर्मियों का आरोप है कि अस्पताल की अनियमितताओं और मरीजों की समस्याओं को उजागर करने पर बीएमओ ने झूठी शिकायत दर्ज कराई। सांसद और विधायक भी बीएमओ के खिलाफ पत्र लिख चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

हाइलाइट्स
मझगवां, स्टार समाचार वेब
स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां की बिगड़ती चिकित्सा व्यवस्था और बीएमओ की कार्यशैली को लेकर अब तक जनाक्रोश व जनप्रतिनिधियों की नाराजगी ही सामने आती थी लेकिन अब उनकी अराजक कार्यशैली ने क्षत्रके मीडियाकर्मियों को भीनाराजगी से भर दिया है। गुरूवार को ऐसे ही नाराज मीडियाकर्मियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर बीएमओ द्वारा मझगवां थाने में की गई कथित झूठी शिकायत पर विरोध जताते हुए सवाल उठाया है कि क्या जनमानस के बुलावे पर मौका स्थल स्ािल पहुंचकर असलियत दिखाना क्या ऐसा गुनाह है कि इसके लिए थाने में शिकायत दर्ज करानी पड़े।
मीडियाकर्मियों ने ज्ञापन सौंपकर कहा कि बीएमओ डा. रूपेश सोनी द्वारा की गई यह शिकायत न केवल झूठी और बदले की भावना से प्रेरित है बल्कि यह रफीक की छवि को धूमिल करने का प्रयास भी ह। इस घटना से पत्रकार समुदाय की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। रामनरेश श्रीवास्तव, जयराम द्विवेदी, अजय गुप्ता, रफीक सौदागर, अमित गुप्ता रवि , एड. विमलेश त्रिपाठी के अलावा कई मीडियाकर्मियों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश हैं, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत हैं।
इसलिए की शिकायत
सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि मझगवां अस्पताल में हो रही अनियमितताओं के साथ साथ अस्पताल में मरीजों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार , बाहर की महंगी दवाएं लिखने जैसी गंभीर समस्याओं को सबूतों के साथ उजागर करने के कारण बीएमओ द्वारा थाने में रपट दर्ज कराई गई है, जबकि वह एक परेशान मरीज के बुलावे पर अस्पताल पहुंचा था। ज्ञापन में बीएमओ के व्यवहार को निरंकुश बताते हुए उन पर अंकुश लगाने और स्थानांतरण की मांग की गई है। मीडियाकर्मियों ने इस ज्ञापन के माध्यम से आग्रह किया है कि बीएमओ द्वारा कराई गई शिकायत व रिपोर्ट को निरस्त किया जाय अन्यथा किसी भी जनहित के मामलों को सामने लाने से मीडियाकर्मी हिचकेंगे।
मरीज से बातचीत करने से रोका
ज्ञापन सौपने के बाद भी बीएमओ की निरंकुशता पर कोई फर्क नहीं आया है। गुरूवार को भी बीएओ की अभद्रता का शिकार मीडियाकर्मियों को होना पड़ा। बताया जाता है कि घायलों की सूचना पर अस्पताल पहुंचे मीडियाकर्मियों से भी बदसलूकी की गई। बताया जाता है कि रामनरेश श्रीवास्ताव, अजय गुप्ता समेत घायल से बातचीत कर रहे थे कि तभी बीएमओ डा. सोनी की नजर पड़ी और उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होने अजय समेत वहां मौजूद मीडियाकर्मियों को भाग जाने के लिए कहा अन्यथा शिकायत दर्ज कराने की बात कही।
रद्दी की टोकरी में सांसद-विधायक की चिट्ठियां
गौरतलब है कि मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति को लेकर सांसद गणेश सिंह और विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार पहले ही प्रभारी मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। सांसद द्वारा 3 जून और विधायक द्वारा 21 मई को भेजे गए पत्रों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि डॉ. रुपेश सोनी स्टाफ क्वार्टर आवंटित होने के बावजूद मुख्यालय में निवास नहीं करते, जिससे पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इन पत्रों के बावजूद अब तक डॉ. सोनी का स्थानांतरण नहीं किया गया है, जिससे जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। चर्चा है कि बीएमओ ने आला अधिकारियों को साध रखा है जिसके कारण उनकी तमाम शिकायतों को नजरंदाज किया जा रहा है। यहां तक कि सांसद-विधायक की चिट्ठी भी रद्दी की टोकरी में फेंक दी गई है।

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