नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले पर पहले ही व्यापक बहस हो चुकी है, इसलिए फिलहाल किसी भी प्रकार का रोक का आदेश नहीं दिया जा सकता। 'फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी' नामक एनजीओ द्वारा दायर इस याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया गया है और अब अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

क्या है CBSE की तीन-भाषा नीति?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के तहत, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड के नए नियमों के अनुसार, छात्रों को कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं पढ़नी होंगी। यदि कोई छात्र विदेशी भाषा सीखना चाहता है, तो वह इसे तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के विकल्प के तौर पर चुन सकता है।

मूल्यांकन और शिक्षकों की कमी पर समाधान

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का पेपर नहीं होगा। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल स्तर पर किया जाएगा और परिणाम को सीबीएसई प्रमाणपत्र में शामिल किया जाएगा। शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए स्कूलों को सेवानिवृत्त शिक्षकों, वर्चुअल लर्निंग और इंटर-स्कूल संसाधन साझा करने जैसी हाइब्रिड व्यवस्था अपनाने की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग छात्रों और विदेश से लौटने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान रखा गया है।

गणित और विज्ञान में भी बड़े बदलाव

2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए 'टू-लेवल' (Two-Level) प्रणाली लागू की जा रही है। इसमें एक अनिवार्य 'स्टैंडर्ड' स्तर और एक वैकल्पिक 'एडवांस्ड' स्तर होगा। यह प्रणाली छात्रों को उनकी क्षमता और विषय के प्रति गहन समझ को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने का अवसर देगी।

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