मध्यप्रदेश में निजी स्कूलो के संचालन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त और नई गाइडलाइन तय कर दी है। अब राज्य में किसी भी निजी हाई और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना, मान्यता, नवीनीकरण, माध्यम या स्थान परिवर्तन के लिए सरकार की नई शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

प्रदेश में अब कहीं भी बिना मंजूरी नहीं चलेगी नई शाखा
छात्र संख्या के आधार पर देना होगा सिक्योरिटी डिपॉजिट
सुरक्षा मानकों को पूरी तरह कर दिया गया है अनिवार्य

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में निजी स्कूलो के संचालन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त और नई गाइडलाइन तय कर दी है। अब राज्य में किसी भी निजी हाई और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना, मान्यता, नवीनीकरण, माध्यम या स्थान परिवर्तन के लिए सरकार की नई शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर स्कूलों पर 2 लाख रुपए तक का जुर्माना और मान्यता निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को मान्यता या नवीनीकरण के लिए अब विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर सुरक्षा निधि जमा करनी होगी। स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, योग्य शिक्षक, आईसीटी, आधुनिक प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
45 दिन में लेना होगा अंतिम निर्णय
हर साल 30 सितंबर तक मिले आनलाइन आवेदनों पर उसी शैक्षणिक सत्र के लिए विचार किया जाएगा। इसके बाद मिलने वाले आवेदन अगले सत्र के लिए माने जाएंगे। आनलाइन आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को 45 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा। आवेदन अधूरा होने पर 15 दिनों के भीतर त्रुटियों की जानकारी दी जाएगी।
राज्य स्तर पर बनेगी मान्यता समिति
नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर एक राज्य मान्यता समिति का गठन किया जाएगा। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त और माध्यमिक शिक्षा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह तीन सदस्यीय समिति स्कूलों की मान्यता, संकाय वृद्धि, स्थान एवं नाम परिवर्तन जैसे मामलों पर नीति और अंतिम निर्णय लेगी।
नियम तोड़ने पर गिरेगी सरकार की गाज
मानकों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर सीधी गाज गिरेगी। सबसे पहले स्कूल को नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाएगा। फिर संतोषजनक जवाब न मिलने पर 1 लाख से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना ठोका जाएगा। वहीं गंभीर मामलों में राज्य मान्यता समिति की अनुमति से स्कूल की मान्यता सीधे समाप्त कर दी जाएगी।
शुल्क के साथ अपील का मिलेगा अधिकार
यदि किसी स्कूल का आवेदन खारिज होता है या मान्यता निरस्त की जाती है, तो संस्था के पास अपील का द्वार खुला रहेगा। प्रथम अपील निर्णय के 30 दिनों के भीतर आयुक्त (लोक शिक्षण) के समक्ष की जा सकेगी। दूसरी बार आयुक्त के फैसले के खिलाफ राज्य मान्यता समिति में अपील की जा सकती है। प्रत्येक अपील के लिए 5,000 रुपए का शुल्क देय होगा।


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