चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए मेटा (Meta) द्वारा AI स्टार्टअप 'मैनस' (Manus) के 2 अरब डॉलर के अधिग्रहण को रोक दिया है। जानें इस फैसले के पीछे के मुख्य कारण और इसके वैश्विक प्रभाव।

चीन। स्टार समाचार चेब
अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा (Meta) को चीन में एक बड़ा झटका लगा है। चीन के नियामक अधिकारियों ने मेटा द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप 'मैनस' (Manus) के प्रस्तावित 2 अरब डॉलर (लगभग ₹16,700 करोड़) के अधिग्रहण सौदे को आधिकारिक तौर पर रोक दिया है।इस फैसले ने न केवल दोनों देशों के बीच तकनीकी युद्ध (Tech War) को और तेज कर दिया है, बल्कि वैश्विक AI बाजार में प्रतिस्पर्धा के नए समीकरण भी पेश किए हैं।
सुरक्षा चिंताओं का दिया हवाला
चीनी नियामकों ने इस सौदे को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे बड़ा आधार बनाया है। बीजिंग का तर्क है कि 'मैनस' जैसी कंपनी के पास मौजूद एल्गोरिदम और डेटा का नियंत्रण अमेरिकी कंपनी के हाथ में जाने से देश की डिजिटल संप्रभुता को खतरा हो सकता है। चीन ने स्पष्ट किया है कि वह संवेदनशील तकनीक के विदेशी हस्तांतरण को लेकर अब पहले से कहीं अधिक सख्त रुख अपना रहा है।
मैनस (Manus) एक उभरता हुआ AI स्टार्टअप है जो उन्नत मशीन लर्निंग मॉडल और डेटा प्रोसेसिंग तकनीकों पर काम करता है। मेटा के लिए यह सौदा बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि मेटा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) के लिए अधिक शक्तिशाली AI टूल विकसित करना चाहता है। मैनस के पास दुनिया के कुछ बेहतरीन AI इंजीनियर और शोधकर्ता हैं। इस अधिग्रहण से मेटा को एशियाई बाजार में अपनी तकनीकी पैठ मजबूत करने में मदद मिलती।
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े टेक सौदे को भू-राजनीतिक कारणों से रोका गया है। पिछले कुछ वर्षों में, अमेरिका और चीन के बीच सेमीकंडक्टर चिप्स, डेटा प्राइवेसी और AI नियंत्रण को लेकर लगातार संघर्ष चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम अमेरिका द्वारा चीनी ऐप्स (जैसे टिकटॉक) और कंपनियों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों की जवाबी कार्रवाई भी हो सकता है।
इस खबर के बाद टेक बाजार में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में अन्य अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन स्थित टेक फर्मों का अधिग्रहण करना लगभग असंभव हो जाएगा। अब मार्क जुकरबर्ग को अपनी AI क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अन्य देशों या घरेलू स्टार्टअप्स की ओर रुख करना होगा। चीन अब अपनी घरेलू AI कंपनियों को संरक्षण देकर उन्हें वैश्विक स्तर पर खड़ा करने की नीति पर काम कर रहा है।

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