चीन की पीएलए ने ताइवान के पास 'जस्टिस मिशन 2025' के तहत लाइव-फायर ड्रिल और नाकेबंदी शुरू की है। ताइवान की सीमा में 90 चीनी विमानों के घुसने से युद्ध का खतरा बढ़ा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

हांगकांग/ताइपे | स्टार समाचार वेब
वर्ष 2025 के समापन के साथ ही पूर्वी एशिया में युद्ध के बादल गहरे होने लगे हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के चारों ओर अपनी घेराबंदी को और कड़ा करते हुए मंगलवार को भी 'ब्लॉकेड ड्रिल' (नाकेबंदी अभ्यास) जारी रखी। इस सैन्य शक्ति प्रदर्शन को चीन ने “जस्टिस मिशन 2025” का नाम दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ताइवान को बाहरी दुनिया से अलग-थलग करने और किसी भी संभावित विदेशी सैन्य सहायता को रोकने की अपनी क्षमता का परीक्षण करना है।
चीन के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने ताइवान के उत्तरी और दक्षिणी जल क्षेत्रों में अपने अत्याधुनिक विध्वंसक (Destroyers), फ्रिगेट, लड़ाकू विमान और घातक बमवर्षकों को तैनात किया है। चीन का दावा है कि वह समुद्र और वायु मार्ग के समन्वय से द्वीप की पूर्ण नाकेबंदी करने में सक्षम है। चीनी सेना के प्रवक्ता ली शी ने जानकारी दी कि फुजियान प्रांत से लंबी दूरी की तोपखाना इकाइयों ने ताइवान के उत्तरी तट से महज 44 किलोमीटर की दूरी पर लाइव गोले दागे हैं, जो वांछित लक्ष्यों को भेदने में सफल रहे।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने इस गतिविधि को 'अत्यंत उत्तेजक' करार दिया है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के भीतर ताइवान के आसपास चीन के 130 लड़ाकू विमान, 14 युद्धपोत और 8 अन्य सरकारी जहाज देखे गए हैं। इनमें से कम से कम 90 विमानों ने ताइवान स्ट्रेट की 'मिडियन लाइन' (मध्य रेखा) को पार कर वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश किया। ताइवान ने इसके जवाब में अपनी मिसाइल प्रणालियों को अलर्ट पर रखा है और नौसैनिक जहाजों को तैनात किया है।
चीन की इस सैन्य गतिविधि का असर अब आम जनजीवन और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ने लगा है। ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास सात अस्थायी “खतरनाक क्षेत्र” (Danger Zones) घोषित किए गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें और समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित हुए हैं। ताइवान की सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने यात्रियों को उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की चेतावनी दी है।
चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने स्पष्ट किया है कि यह अभ्यास उन अलगाववादी ताकतों के लिए एक चेतावनी है जो अमेरिका जैसे देशों से हथियार खरीदकर ताइवान को चीन से अलग करने का सपना देख रहे हैं। बीजिंग का मानना है कि ताइवान उसका अभिन्न हिस्सा है और वह इसे मुख्य भूमि में मिलाने के लिए सैन्य बल के प्रयोग से पीछे नहीं हटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि "जस्टिस मिशन 2025" केवल एक ड्रिल नहीं, बल्कि भविष्य में ताइवान पर पूर्ण नियंत्रण पाने की एक 'ड्रेस रिहर्सल' है। ताइवान के रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि चीन की ये कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता को अस्थिर कर रही हैं और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

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