मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नगालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में नाबाद 400 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। जानिए इस रिकॉर्ड पारी और बाबासाहेब निंबालकर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जुड़ी पूरी जानकारी।

मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नगालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए इतिहास रच दिया है। दीमापुर में खेले गए इस मुकाबले में उन्होंने 400 रनों की नाबाद ऐतिहासिक पारी खेली। इस उपलब्धि के साथ ही वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में यह जादुई आंकड़ा छूने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले साल 1948 में महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए बाबासाहेब निंबालकर ने काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। चिन्मय का यह प्रदर्शन भारतीय घरेलू क्रिकेट में हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।
29 वर्षीय चिन्मय सुतार ने दीमापुर के मैदान पर अपनी इस मैराथन पारी के दौरान कुल 517 गेंदों का सामना किया, जिसमें उन्होंने 46 चौके और 7 शानदार छक्के जड़े। इस पारी की बदौलत वे रणजी ट्रॉफी इतिहास की एक पारी में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में पृथ्वी शॉ के 379 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। अपनी बेहतरीन तकनीकी दक्षता और संयम का परिचय देते हुए चिन्मय ने मैदान के चारों ओर रन बटोरे और गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया।
मिजोरम की पारी की शुरुआत बेहद खराब रही थी और शुरुआती बल्लेबाज सस्ते में पवेलियन लौट गए थे। साहिल रेजा मात्र 4 रन बनाकर आउट हुए, लालरुआइजेला ने 31 रन बनाए, जोसेफ ललथनखुमा 1 रन ही बना सके और मनेंद्र सिंह ने 27 रनों का योगदान दिया। इसके बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे चिन्मय ने विकेटकीपर जेहु एंडरसन के साथ मिलकर 168 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिसमें एंडरसन ने 151 गेंदों पर 69 रन बनाए।
एक समय नागालैंड के गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए मिजोरम का स्कोर 314 रन पर 4 विकेट से गिराकर 392 रन पर 9 विकेट कर दिया था। ऐसे मुश्किल समय में नौ विकेट गिरने के बाद चिन्मय और आखिरी बल्लेबाज लालरेमपुइया छकछुआक ने मोर्चा संभाला। दोनों ने अंतिम विकेट के लिए रिकॉर्ड 189 रनों की नाबाद साझेदारी कर डाली। छकछुआक ने 76 गेंदों पर 14 रन बनाए, जबकि इसी साझेदारी के दौरान चिन्मय ने अपने 400 रन पूरे किए। इसके बाद मिजोरम ने 581 रन पर 9 विकेट के स्कोर पर अपनी पारी घोषित कर दी।
चिन्मय सुतार ने अपने करियर का महज दूसरा फर्स्ट क्लास मैच खेलते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। साल 2026-27 के घरेलू सीजन से ठीक पहले उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) से एनओसी (NOC) लेकर मिजोरम की टीम का दामन थामा था। मिजोरम के लिए अपने रणजी ट्रॉफी डेब्यू मैच में ही उन्होंने मणिपुर के खिलाफ पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाए थे, हालांकि उस मैच में टीम को 3 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था।
इससे पहले इस साल चिन्मय विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेले थे। वहीं, जून महीने में उन्होंने मुंबई टी-20 लीग में मराठा रॉयल्स को खिताब बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उस टूर्नामेंट में लगातार दो अर्धशतक लगाने वाले चिन्मय ने छह पारियों में कुल 212 रन बनाए थे, इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट लगभग 120 का रहा था।
चिन्मय सुतार की इस पारी ने देश के पहले और महान तिहरे-चौहरे शतकवीर बाबासाहेब निंबालकर की यादें ताजा कर दी हैं। निंबालकर ने दिसंबर 1948 में पुणे में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रनों की पारी खेली थी, जिसमें 49 चौके और एक छक्का शामिल था। उस मुकाबले में काठियावाड़ ने पहली पारी में 238 रन बनाए थे, जिसके जवाब में महाराष्ट्र ने 826 रन पर 4 विकेट का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया था।
मैच के तीसरे दिन जब निंबालकर 443 रन बनाकर खेल रहे थे, तब वे महान डॉन ब्रैडमैन के 452 रनों के तत्कालीन फर्स्ट क्लास विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने से मात्र 9 रन दूर थे। हालांकि, लंच के बाद काठियावाड़ के कप्तान ने महाराष्ट्र द्वारा पारी घोषित न किए जाने के विरोध में मैदान पर उतरने से साफ इनकार कर दिया था। महाराष्ट्र के कप्तान राजा गोखले और अंपायरों ने उनसे कुछ और ओवर खेलने की अपील की थी ताकि निंबालकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर सकें, लेकिन काठियावाड़ की टीम मैदान छोड़कर चली गई और इस तरह मैच का अंत हो गया था।
मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नगालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में नाबाद 400 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। जानिए इस रिकॉर्ड पारी और बाबासाहेब निंबालकर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जुड़ी पूरी जानकारी।
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