इजराइल-ईरान तनाव के बीच दुबई में फंसे रीवा और दमोह के 11 भारतीयों को डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के प्रयासों से भारत लौटने में मदद मिली। सभी नागरिक सुरक्षित दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर राहत महसूस कर रहे हैं।
By: Yogesh Patel
Mar 08, 20264:12 PM
हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। जिसके चलते ईरान अमेरिका का सहयोग करने वाले खाड़ी के आठ देशों में मिसाइल दाग रहा है। इसमें दुबई भी शामिल है। लगातार यहां पर मिसाइल अटैक हो रहे हैं। इसी के चलते यहां पर बड़ी संख्या में भारतीय फंस गये हैं। जिन्हें बारी-बारी से भारत लाया जा रहा है। इसी चक्कर में यहां पर रीवा की एक महिला समेत दमोह के 7 नागरिक फंस गये थे। इनमें चार महिला, चार पुरुष व तीन बच्चे शामिल थे। लेकिन इनके भारत लौटने पर अड़ंगा लग गया था। ऐसे में उक्त परिवार की जानकारी डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला तक पहुंची। उन्होंने प्रयास किया जिसके फलस्वरूप सभी नागरिक भारत शुक्रवार की रात करीब 1 बजे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंच गये हैं। इसके बाद इन्होंने राहत की सांस ली।
ये लोग फंसे थे
जानकारी के अनुसार जिन लोगों को डिप्टी सीएम के माध्यम से भारत लौटने का मौका मिला है, उनमें सूरज आहूजा 30 वर्ष, साक्षी अहूजा 30 वर्ष, मोहित लालवानी 30 वर्ष, स्वाती लालवानी 28 वर्ष, सुभम कुकरेजा 30 वर्ष, लता कुकरेजा 30 वर्ष, राहुल कोटवानी 28 वर्ष, निकिता कोटवानी 28 वर्ष, वैशाली कुकरेजा 18 माह, नैना अहूजा 3 वर्ष एवं कृतिका लालवानी 4 वर्ष शामिल हैं। सभी लोग 27 फरवरी की रात दुबई पहुंचे थे। लेकिन अगली सुबह यानी 28 फरवरी को जब सो कर उठे तो दुबई में हाहाकार मचा हुआ था। सभी दुबई के ओमेगा होटल में कैद हो गये थे। होटल के आसपास ही मिसाइल गिर रही थी। ऐसे में सभी डरे सहमे थे। उन्हें भारत लौटने का विकल्प नहीं नजर आ रहा था।
ऐसे हुआ डिप्टी सीएम से संपर्क
उक्त लोगों में शामिल कुकरेजा फैमली ने डिप्टी सीएम के प्रतिनिधि प्रकाश सोनी चिंटू से संपर्क किया। दूरभाष पर स्थिति को बताया। साथ ही जल्द से जल्द भारत लौटने की व्यवस्था बनवाने का आग्रह किया। इस बात को को प्रतिनिधि ने सीधे उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला को बताया। लिहाजा डिप्टी सीएम ने दुबई में फंसे लोगो से फोन पर बात की। इसके बाद स्थिति को गंभीरता से लेते हुये उन्होंने भारत सरकार के जिम्मेदारों से बात की। जिसकी बदौलत उक्त परिवार के भारत लौटने का रास्ता आसान हुआ।