धार भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष ने ASI की सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए नई याचिका की तैयारी की है। जानें कमाल मौला मस्जिद और राजा भोज महल के अवशेषों से जुड़े ऐतिहासिक दावे।

धार/इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की एएसआई (ASI) सर्वे रिपोर्ट को लेकर कानूनी विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पेश की गई हालिया रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। मुस्लिम समाज ने अब इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए एक स्वतंत्र याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मुस्लिम पक्ष का मुख्य विरोध एएसआई के उस निष्कर्ष पर है जिसमें कहा गया है कि वर्तमान कमाल मौला मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था। मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का तर्क है कि एएसआई के ये दावे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत हैं। उनके अनुसार, यह स्थल सदियों से एक मस्जिद के रूप में स्थापित रहा है।
अपनी याचिका के समर्थन में मुस्लिम पक्ष ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण दलीलें पेश की हैं:
1903 का सर्वे: उन्होंने 1903 के ब्रिटिश कालीन एएसआई सर्वेक्षण का संदर्भ दिया है, जिसमें इस स्थल को आधिकारिक तौर पर 'कमाल मौला मस्जिद' के रूप में दर्ज और एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था।
हजरत कमाल मौलाना का आगमन: दावा किया गया है कि इस्लाम के प्रचार के लिए 1295 ईस्वी में निजामुद्दीन औलिया के खलीफा कमाल मौलाना धार आए थे। मालवा के तत्कालीन शासक महमूद खिलजी ने उन्हें भूमि दान में दी थी, जहाँ मदरसा और मस्जिद का निर्माण हुआ।
पत्थरों के अवशेषों का सच: मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद निर्माण में राजा भोज के महल के पत्थरों का उपयोग जरूर हुआ था, लेकिन इसका कारण यह था कि उस समय भारी निर्माण सामग्री का परिवहन अत्यंत कठिन था। उनके अनुसार, राजा भोज का महल चालुक्य-सोलंकी राजवंश के आक्रमण के दौरान नष्ट हो गया था और उन्हीं बिखरे हुए अवशेषों को मस्जिद निर्माण में उपयोग में लाया गया।
इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को एएसआई की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय दिया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्ष अपनी आपत्तियां, दावे और सुझाव पेश कर सकते हैं। इसके लिए दो सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी, जहाँ दोनों पक्ष अपनी दलीलों के साथ उपस्थित रहेंगे।
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