फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा के मुद्दों पर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुली बॉर्डर नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।

फ्रांस में महंगाई, शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय संकट और जीवनयापन के खर्चों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी हिंसक संघर्ष का रूप ले चुके हैं। पेरिस सहित ल्योन, मार्सिले और नैनटेस जैसे प्रमुख शहरों में सड़कों पर लाखों लोग उतर आए हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का सहारा लेना पड़ा है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर तीखा बयान देते हुए इसे देश की खुली आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों का परिणाम बताया है।
जॉर्जिया के पेरी में एक रिपब्लिकन रैली को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के लिए वहां की बॉर्डर पॉलिसी को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने शिक्षा संबंधी मुद्दों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि फ्रांस इसलिए सुलग रहा है क्योंकि उसने अपने दरवाजे उन लोगों के लिए खोल दिए हैं जो देश और वहां के नागरिकों से नफरत करते हैं। उन्होंने फ्रांस में पुलिस को उनके अधिकार न मिलने का भी जिक्र किया और इसे अमेरिकी आव्रजन नीतियों के साथ जोड़ते हुए अपनी नीतियों को अधिक सख्त और सुरक्षित बताया।
फ्रांस 24 और एएनआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश भर में करीब 4,10,000 लोगों ने मार्च निकाला है। शुरुआती चरण में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन धीरे-धीरे यह हिंसक झड़पों में बदल गए। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने पुष्टि की है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे देश में सुरक्षा बलों के लगभग 70,000 जवानों को तैनात किया गया है और अब तक करीब 100 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार का मुख्य फोकस पेरिस और अन्य क्षेत्रीय हब में कानून-व्यवस्था बहाल करना है ताकि हालिया हिंसा के दौर को फिर से दोहराने से रोका जा सके।
फ्रांस के बहाने अपनी घरेलू नीतियों को सही ठहराते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में भी आव्रजन के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात दोहराई। उनके प्रशासन के लौटने के बाद से अब तक 3,00,000 से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं। इसके अलावा, हाल ही में भारतीय आईटी कंपनियों जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस की कुछ ग्रीन कार्ड फाइलिंग पर रोक लगाने के साथ-साथ कई प्रमुख विश्वविद्यालयों की भी जांच शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।

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फ्रांस में बढ़ती महंगाई और शिक्षा के मुद्दों पर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुली बॉर्डर नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
फ्रांस में महंगाई, स्कूलों की बदहाली और पुलिस की सख्ती के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। पेरिस समेत देश के कई प्रमुख शहरों में लाखों लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
हरियाणा एसटीएफ ने विदेश में छिपे बैठे अपराधियों पर बड़ा प्रहार किया है। अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग से चलाए जा रहे अभियान में दो बड़े और कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है। हिमांशु भाऊ ने हिमांशु सिगरोहा के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया था।
धार्मिक अल्पसंख्यकों संग बर्ताव को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की तीखी आलोचना की। भारत ने कहा-पाकिस्तान अपने देश के कमजोर समुदायों की रक्षा करने में नाकाम रहा है। उल्टा भारत को धार्मिक आजादी, अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव को लेकर ज्ञान देने की कोशिश कर रहा है।
तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप आया है। भारतीय समयानुसार बीती देर रात भूकंप के झटके महसूस हुए। इसमें 16 लोगों की मौत हो गई और 54 लोग घायल हो गए। इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट और अरामको तेल ठिकाने पर हुए हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए हैं। अमेरिका ने अपने राजनयिकों को वापस बुलाया है।
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को भारत-आधारित आपराधिक समूह बताए जाने पर भारत ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत बताया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी दौरे के बाद भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक सहयोग और व्यापार समझौते को लेकर तेज हुई हलचल की पूरी जानकारी।
स्पेसएक्स और एलन मस्क पर यूक्रेन के स्टारलिंक इंटरनेट को जानबूझकर धीमा करने के आरोप लगे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की के इन आरोपों पर अमेरिका ने क्या सफाई दी है, जानें विस्तार से।