भारत की पहली डिजिटल जनगणना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। जानें 33 सवालों की सूची, लिव-इन कपल्स के लिए शादीशुदा का दर्जा और आजादी के बाद पहली बार होने वाली जातिगत गणना की पूरी जानकारी।
By: Ajay Tiwari
Mar 30, 20262:53 PM
नई दिल्ली: भारत में बहुप्रतीक्षित डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणना-2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहा है। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि यह न केवल पूरी तरह डिजिटल होगी, बल्कि इसमें पहली बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।
सरकार ने इस जनगणना के लिए 33 सवालों की सूची जारी की है। इसमें एक महत्वपूर्ण बदलाव 'लिव-इन कपल्स' को लेकर किया गया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई कपल स्थिर रिश्ते (Stable Relationship) में रह रहा है और वे स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है, तो उन्हें शादीशुदा (Married) श्रेणी में ही गिना जाएगा। जनगणना के फॉर्म में इस तरह के सामाजिक बदलावों को स्थान दिया गया है।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी।
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग):
यह 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य देश में घरों की संख्या और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं (जैसे पानी, बिजली, शौचालय आदि) का डेटा एकत्र करना है।
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना):
इसमें आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। इसकी रेफरेंस डेट (संदर्भ तिथि) 1 मार्च 2027 तय की गई है। यानी 1 मार्च 2027 की आधी रात को देश की जनसांख्यिकीय स्थिति क्या है, यही अंतिम आंकड़ों का आधार होगा।
इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जातिगत डेटा का संकलन है। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब आधिकारिक जनगणना में जातियों की गिनती की जाएगी। इससे पहले वर्ष 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान अंतिम बार जाति आधारित जनगणना हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर अपनी मुहर लगाई है।
डिजिटल ऐप: लगभग 30 लाख कर्मचारी एंड्रॉइड और आईओएस (iOS) आधारित मोबाइल ऐप्स के जरिए घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगे।
सेल्फ एन्यूमरेशन: लोगों को स्वयं अपनी जानकारी भरने (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया गया है, जहाँ अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) की मदद से लोग अपनी डिटेल भर सकेंगे।
रीयल टाइम डेटा: मोबाइल ऐप्स के इस्तेमाल से डेटा का ट्रांसफर रीयल टाइम में होगा, जिससे यह प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी।
नियमतः भारत में हर 10 साल में जनगणना होती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसके अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी। अगली गणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। अब यह प्रक्रिया 2026-27 में संपन्न होने जा रही है।