केंद्र सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण के तहत 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को फोर-ट्रैक करने और तीन नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे 14 जिलों और 56 लाख लोगों को फायदा मिलेगा।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
केंद्र सरकार भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और इसके पूर्ण आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी दी कि सरकार पिछले 12 वर्षों से रेलवे के व्यापक बदलाव और कायाकल्प पर काम कर रही है। इस कड़ी में देश के प्रमुख रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है।
रेलवे के नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुकूल तैयार किया जा रहा है। इसके तहत देश के सात प्रमुख हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक और क्वाड्रुपल (चार-लेन) करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन व्यस्त मार्गों पर ट्रैक क्षमता में भारी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे भविष्य में यातायात का बढ़ता दबाव आसानी से संभाला जा सके।
रेलवे के इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) और उसके दोनों मुख्य डायगोनल शामिल हैं-
दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली मार्ग मिलकर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल बनाते हैं।
दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता इसके दो प्रमुख डायगोनल हैं।
इसके अलावा, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इन सभी सात कॉरिडोर को चार-लेन करने का काम चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर के हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।
कैबिनेट समिति ने रेलवे मंत्रालय की तीन नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इन पर कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।
इन प्रोजेक्ट्स के तहत निम्नलिखित प्रमुख रूटों पर काम किया जाएगा....
खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन का निर्माण।
कटनी और पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी लाइन का निर्माण।
बिलासपुर (उसलापुर) और पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन का निर्माण।
इन अतिरिक्त लाइनों के बनने से इन व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे परिचालन दक्षता और सेवा की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। साथ ही, रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने में भी खासी मदद मिलेगी।
यह तीनों मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं देश के पांच प्रमुख राज्यों—पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इससे लगभग 4,790 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 56 लाख है। इससे इन क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को एक नई गति मिलेगी।
इन सभी परियोजनाओं की रूपरेखा 'पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' के तहत तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक्स क्षमता को अधिक प्रभावी बनाना है। एकीकृत योजना और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रियों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतरीन परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हों।
इन रेल विकास परियोजनाओं के शुरू होने से देश के कई प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी भी बेहद मजबूत हो जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल क्षेत्र हैं:
तारातारिणी मंदिर और श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व
विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर और ज्वालेश्वर धाम
खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर
ये रेल मार्ग देश के कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी भारी औद्योगिक वस्तुओं की ढुलाई के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। क्षमता विस्तार के बाद इन मार्गों पर माल ढुलाई में सालाना करीब 2.7 करोड़ टन (27 MTPA) अतिरिक्त यातायात की संभावना है, जिससे देश के भीतर माल परिवहन और सुगम हो जाएगा।
रेलवे को पहले से ही पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम माना जाता है। इन आधुनिकीकरण परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने में बड़ी मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी और सालाना लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) उत्सर्जन कम होगा। यह पर्यावरणीय लाभ करीब 2.48 करोड़ नए पेड़ लगाने के बराबर है।
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