इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से एक और मौत के बाद हड़कंप। जानें 26 मौतों का पूरा सच, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति और प्रशासन द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने के काम की लेटेस्ट अपडेट।

फाइल फोटो
इंदौर. स्टार समाचार वेब
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी सप्लाई के कारण उपजी त्रासदी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की मृत्यु के साथ ही इस जल जनित संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या अब 26 हो गई है। बद्री प्रसाद को उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के बाद 17 जनवरी को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि वे पहले से टीबी की बीमारी से भी जूझ रहे थे, लेकिन दूषित पानी के संक्रमण ने स्थिति को जानलेवा बना दिया। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 10 से अधिक मरीज अब भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जिनमें से कुछ वेंटिलेटर और आईसीयू में भर्ती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती मरीजों में से अधिकांश पहले से ही किसी न किसी अन्य गंभीर बीमारी (Co-morbidity) से ग्रस्त हैं। अरबिंदो अस्पताल में भर्ती एक 66 वर्षीय महिला लिवर संक्रमण से पीड़ित है, जबकि बॉम्बे हॉस्पिटल में एक 65 वर्षीय बुजुर्ग 'मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम' के कारण वेंटिलेटर पर हैं। केयर सीएचएल और अपोलो अस्पताल में भी गंभीर संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों का इलाज चल रहा है। हालांकि, कुछ मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ है जिन्हें जल्द ही डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना अब नगर निगम और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। भागीरथपुरा के केवल 30% हिस्से में ही फिलहाल नियमित टेस्टिंग के बाद एक दिन छोड़कर जल प्रदाय शुरू हो सका है। शेष 70% हिस्से में पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदलने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला के अनुसार, जनवरी माह के अंत तक नई मुख्य पाइपलाइन डालने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में लोगों की प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन 50 से अधिक टैंकरों का सहारा लिया जा रहा है, जिन्हें तंग गलियों के भीतर तक भेजा जा रहा है ताकि निवासियों को असुविधा न हो।
इस पूरे मामले में मौतों के आंकड़ों को लेकर प्रशासन शुरू से ही संदेह के घेरे में रहा है। जहां स्थानीय स्तर पर मौतों की संख्या 26 बताई जा रही है, वहीं प्रशासन ने शुरुआती दौर में केवल 4 से 6 मौतें ही स्वीकार की थीं। हाई कोर्ट में पेश की गई पिछली रिपोर्ट में भी 21 में से केवल 15 मौतों को ही इस संक्रमण से संबंधित माना गया था। अब सबकी नजरें 27 जनवरी को पेश होने वाली अगली स्टेटस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसमें प्रशासन को मौतों और पाइपलाइन सुधार कार्य की वास्तविक स्थिति का ब्यौरा देना होगा।

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