अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के 20वें दिन सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी पर हमला हुआ। यनबू पोर्ट और खाड़ी के तेल ठिकानों पर ड्रोन अटैक के बाद तनाव चरम पर है।
By: Ajay Tiwari
Mar 19, 20263:29 PM
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के 20वें दिन हिंसा की आग सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों तक पहुँच गई है। सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यनबू पोर्ट स्थित सैमरेफ (SAMREF) तेल रिफाइनरी पर भीषण हवाई हमला हुआ है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति चरमराने का खतरा पैदा हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण यनबू पोर्ट वर्तमान में तेल निर्यात का मुख्य केंद्र बना हुआ था। ताजा हमलों ने न केवल सऊदी बल्कि UAE और कतर के तेल-गैस संयंत्रों को भी अपनी चपेट में लिया है। गौरतलब है कि ईरान ने हाल ही में इन देशों को चेतावनी दी थी कि वे अपने तेल ठिकानों को खाली कर दें।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा.. "हमारे सब्र का इम्तिहान न लें। सऊदी अरब के पास ईरान के दुस्साहस का जवाब देने की पूरी सैन्य क्षमता है। ये हमले सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगते हैं और इन्हें तुरंत रुकना चाहिए।"
युद्ध की तपिश अब सात समंदर पार अमेरिका तक पहुँच गई है। वॉशिंगटन स्थित फोर्ट लेसली जे. मैकनेयर सैन्य बेस के ऊपर कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इसी बेस के भीतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ठहरे हुए हैं।
सुरक्षा अलर्ट: संदिग्ध गतिविधियों के बाद अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा स्तर बढ़ाकर 'चार्ली' (Charlie) कर दिया है।
हाई अलर्ट पर बेस: न्यू जर्सी के जॉइंट बेस मैकग्वायर-डिक्स-लेकहर्स्ट और फ्लोरिडा के मैकडिल एयर फोर्स बेस पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
दूतावासों को चेतावनी: दुनियाभर में मौजूद अमेरिकी दूतावासों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया गया है।
युद्ध के बीच ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही विरोधाभास उभर आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा है कि ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू नहीं किया है।
गबार्ड का यह दावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस तर्क को चुनौती देता है, जिसमें उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को वर्तमान युद्ध का मुख्य कारण बताया था। गबार्ड के अनुसार, 2025 में हुए हमलों के बाद ईरान की परमाणु ताकत लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि, डेमोक्रेटिक नेता मार्क वार्नर ने गबार्ड पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है।