राजस्थान पुलिस को जबलपुर हाईकोर्ट की फटकार। वसुंधरा राजे फर्जी पत्र मामले में गिरफ्तार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पेश करने का निर्देश। जानें क्या है बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का पूरा मामला।

जबलपुर: स्टार समाचार वेब
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक फर्जी पत्र के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उन्हें अदालत में पेश न किए जाने पर माननीय उच्च न्यायालय ने राजस्थान पुलिस को सख्त फटकार लगाई है।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने 'बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका' (Habeas Corpus Petition) पर सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पिछली सुनवाई के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपियों—निखिल, बिलाल और इनाम—को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। पुलिस द्वारा दिए गए "मिस कम्यूनिकेशन" के तर्क को अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस को दो दिन का समय देते हुए कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि तीनों आरोपियों को 29 अप्रैल को हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही गिरफ्तारी से संबंधित सभी कानूनी दस्तावेज और उस समय के सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं।
यह विवाद वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए एक पत्र से शुरू हुआ था, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी की गई थी। इस पत्र को फर्जी पाए जाने के बाद राजस्थान पुलिस ने भोपाल पुलिस के साथ मिलकर कांग्रेस आईटी सेल के इन तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।
परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी इस कार्रवाई को "गैरकानूनी" बताते हुए कहा कि आरोपियों को 30 घंटे तक बिना किसी ठोस आधार के हिरासत में रखा गया।

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