कोटर तहसील के सरकारी स्कूल जर्जर भवनों, शिक्षकों की गैरमौजूदगी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा खतरे में है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़, विद्यालय से नदारत रहते हैं शिक्षक
कोटर, स्टार समाचार वेब
कोटर तहसील क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की बदहाली शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। आलम यह है कि यहां के स्कूलों के भवन बद्हाल हालत में हैं, और कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। स्कूलों की जर्जरता के कारण नौनिहालों का जीवन भी खतरे मे है। विडम्बना तो यह है कि सब कुछ जानते हुए भी संबंधित अधिकारी आंखों में पट्टी बांधे हुए हैं।
योजनाओं पर उठ रहे सवाल
यहां के विद्यालयों के भवनों की बद्तर हालत सरकारी योजनाओं और शिक्षा की व्यवस्था सवाल खड़े कर रही है। ये स्कूल अपनी जर्जर इमारतों, शिक्षकों की कमी या अधिकता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेल रहे हैं।
ढोढ़ी प्राथमिक स्कूल
बताया गया है कि ढोढी प्राथमिक स्कूल में दो शिक्षकों के बावजूद मात्र पांच बच्चे नामांकित हैं, और ये भी अक्सर स्कूल से नदारद रहते हैं। निरीक्षण के दौरान बच्चे अपने मामा के घर होने का बहाना बनाकर अनुपस्थित मिले, जबकि शिक्षक परिसर में मौजूद थे। मध्यान्ह भोजन नहीं बना था और पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। स्कूल का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
मगरवार प्राथमिक स्कूल
मगरवार प्राथमिक स्कूल में 15 बच्चों पर दो शिक्षक हैं, लेकिन पीने के पानी की समस्या विकराल है, क्योंकि हैंडपंप खराब है। स्कूल का भवन भी जर्जर अवस्था में है, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।
माधवपुर प्राथमिक स्कूल
माधवपुर प्राथमिक स्कूल में सात बच्चों पर दो शिक्षक हैं, जिनमें से एक मौके से नदारद मिले। शिक्षिका अर्चना पुरवार उपस्थित थीं, लेकिन स्कूल का हैंडपंप दो साल से खराब है और बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिस कारण बच्चों को रसोई घर में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
रखौदा प्राथमिक शाला
रखौदा प्राथमिक शाला में 50 बच्चों पर केवल दो शिक्षक हैं, जिससे पढ़ाई का स्तर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मध्यान्ह भोजन में केवल खिचड़ी दी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि शिक्षक अक्सर स्कूल से नदारद रहते हैं और बच्चों के साथ बाउंड्री वॉल पर चढ़कर कूदते देखे गए हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
निरीक्षण का अभाव
आरोप लग रहे हैं कि इन स्कूलों में संबंधित अधिकारियों द्धारा निरीक्षण न करना अव्यस्था का सबसे बड़ा कारण है। निरीक्षण के अभाव में यहां पदस्थ शिक्षक मनमानी कर रहे हैं। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि शिक्षक केवल अपनी मासिक सैलरी उठाने के लिए स्कूल आते हैं, पढ़ाई के नाम पर यहां जीरो काम हो रहा है। ये स्कूल अब बंद होने की कगार पर हैं, और यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इन मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय हो जाएगा।

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