सरकार ने LIC में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 6.5% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। जानिए इससे जुड़ी सभी खास बातें, शेयर बाजार पर असर और पूरी डिटेल।

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इस अहम घोषणा के बाद मंगलवार को शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया और शुरुआती कारोबार में ही शेयर 7% से ज्यादा लुढ़क गए।
सरकार यह हिस्सेदारी 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए बेच रही है। इस बड़े फैसले का मुख्य मकसद क्या है, सरकार कुल कितनी हिस्सेदारी बेच रही है और शेयर की कीमत क्या तय की गई है? आइए इन सभी पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट और एक्सचेंज को दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के जरिए LIC में 6.5% तक की हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस बिक्री का मुख्य उद्देश्य कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़ी रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करना है। देश के मार्केट रेगुलेटर ने LIC को 16 मई 2027 तक कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम को पूरा करने की अनुमति दी है। यदि यह ऑफर पूरी तरह सफल रहता है, तो LIC की पब्लिक शेयरहोल्डिंग मौजूदा 3.5% से बढ़कर सीधे 10% हो जाएगी। डिसइन्वेस्टमेंट सेक्रेटरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि, "इससे MPS (मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग) के लक्ष्यों को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी।"
बेस ऑफर और ग्रीन शू विकल्प: LIC के इस ऑफर फॉर सेल में 2% तक इक्विटी हिस्सेदारी का बेस ऑफर शामिल है, साथ ही इसमें अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प (ग्रीन शू ऑप्शन) भी रखा गया है।
खुलने की तारीख: यह ऑफर नॉन-रिटेल इन्वेस्टर्स (संस्थागत निवेशकों) के लिए मंगलवार को और रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए बुधवार को खुला है।
फ्लोर प्राइस: सरकार ने इसके लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इस फ्लोर प्राइस के हिसाब से 6.5% हिस्सेदारी की कुल कीमत लगभग 314.1 अरब रुपये बैठती है।
आपको बता दें कि LIC मई 2022 में देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ (IPOs) में से एक के जरिए शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। उस समय सरकार ने कंपनी में 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। यह नया ‘ऑफर फॉर सेल’ लिस्टिंग के बाद से इंश्योरेंस सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी में सरकार का पहला बड़ा डिसइन्वेस्टमेंट है।
यह पूरी बिक्री ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपने विनिवेश कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 800 अरब रुपये का विनिवेश और एसेट मोनेटाइज़ेशन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस चालू वित्त वर्ष में अब तक सरकार हिस्सेदारी बेचकर 212 अरब रुपये जुटा चुकी है। इस आंकड़े में NHPC, कोल इंडिया और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प (IRFC) जैसी प्रमुख कंपनियों में OFS के जरिए की गई शेयर बिक्री भी शामिल है।
सरकार द्वारा OFS के जरिए हिस्सेदारी बेचने के ऐलान का असर तुरंत शेयर बाजार पर देखने को मिला। मंगलवार को दोपहर के कारोबार में LIC का शेयर लगभग 8% की भारी गिरावट के साथ 393.40 रुपये के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर फिसलकर 390.50 रुपये के निचले स्तर तक चला गया था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक बड़े पैमाने पर शेयरों की सप्लाई आने के कारण निवेशकों में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।

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