टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक बढ़ाने को बोर्ड ने दी मंजूरी। टाटा समूह को शेयर बाजार में उतारने का भी फैसला। जानिए नोएल टाटा के साथ मतभेद और इस्तीफे के पूरे घटनाक्रम की अंदरूनी कहानी।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
टाटा समूह (Tata Group) से जुड़ी एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) का कार्यकाल साल 2032 तक के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, टाटा समूह ने अपनी मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार (Share Market) में लिस्ट करने यानी आईपीओ (IPO) लाने का भी बड़ा निर्णय लिया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ समय पहले ही समूह के भीतर नेतृत्व और नीतियों को लेकर काफी चर्चा और उथल-पुथल देखने को मिली थी। हालांकि, चंद्रशेखरन के इस नए कार्यकाल को अभी आगामी सालाना आम बैठक (AGM) में अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
टाटा समूह के इतिहास में यह अपने आप में एक अनूठा मामला है। ग्रुप की मौजूदा नीतियों के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव पदों पर काम करने वाले अधिकारी आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं, हालांकि नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों पर 70 साल तक बने रहने का प्रावधान है।
एन. चंद्रशेखरन वर्तमान में 63 वर्ष के हैं और उनका नया कार्यकाल पूरा होने पर वे 70 वर्ष के हो जाएंगे। इस प्रकार, टाटा समूह में यह पहली बार हुआ है कि कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 वर्ष की निर्धारित रिटायरमेंट उम्र पार करने के बाद भी इस अहम पद पर बना रहेगा। चंद्रशेखरन ने साल 1987 में टीसीएस (TCS) में एक इंटर्न के रूप में अपने कॉर्पोरेट करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद अक्टूबर 2016 में वे पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन की कमान सौंपी गई।
यह पूरा घटनाक्रम रातों-रात तय नहीं हुआ है। इससे पहले 12 अगस्त 2026 को एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस दौरान उनके और टाटा ट्रस्ट के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई थीं, जिसके कारण ट्रस्ट के भीतर खींचतान शुरू हो गई थी।
इस्तीफे के वक्त एक भावुक संदेश में चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया था कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके अगले 5 साल के कार्यकाल विस्तार की सिफारिश की थी। लेकिन, टाटा संस बोर्ड की बैठक में एक सदस्य (नोएल टाटा) द्वारा समर्थन न मिलने के कारण मामला अटक गया था। छह महीने तक कोई ठोस निर्णय न आने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि टाटा संस जैसे विशाल संस्थान और रणनीतिक प्रोजेक्ट्स के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता होना बेहद जरूरी है।
वर्तमान में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने के फैसले को सालाना आम बैठक की मंजूरी मिलना अभी बाकी है। इस बैठक में टाटा ट्रस्ट की लगभग 66% हिस्सेदारी है, जो निर्णायक भूमिका निभाएगी। जहां एक ओर टाटा ट्रस्ट के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा इस फैसले के विरोध में हैं, वहीं वेनु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का खुलकर समर्थन किया है।
इसके अलावा, टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करने का निर्णय समूह के भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आंतरिक असहमतियों के बीच समूह अपने इन बड़े लक्ष्यों को किस प्रकार साधता है।

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