लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में हंगामे पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने विपक्ष को अनुशासन की लक्ष्मण रेखा याद दिलाई और बताया कि सदन की गरिमा के लिए कड़े निर्णय क्यों जरूरी हैं
By: Ajay Tiwari
Mar 12, 20263:22 PM
हाइलाइट्स
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध और हंगामे के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को आसन पर लौटते ही विपक्ष को सख्त नसीहत दी। सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कड़े फैसले क्यों लेने पड़े और सांसदों के लिए सदन की 'लक्ष्मण रेखा' क्या है। उनके इस संबोधन को विपक्ष के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
लंबे समय के बाद सदन के संचालन के लिए आसन पर लौटे ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र की इस सबसे बड़ी पंचायत की अपनी एक गरिमा है। अगर कोई सांसद जानबूझकर सदन की मर्यादा को लांघता है या आसन की अवमानना करता है, तो मजबूरन कड़े फैसले लेने पड़ते हैं।" उन्होंने साफ किया कि उनके फैसले किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सदन की पवित्रता बनाए रखने के लिए होते हैं।
अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि वे हमेशा से सभी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय देते रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं पक्ष और विपक्ष दोनों का संरक्षक हूँ। मेरा प्रयास रहता है कि हर गंभीर मुद्दे पर सार्थक चर्चा हो, लेकिन चर्चा शोर-शराबे और दबाव में नहीं हो सकती।" बिरला के इस कड़े रुख के बाद सदन में सन्नाटा पसर गया। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे सदन की मर्यादा के भीतर रहकर अपनी बात रखें ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित न हो।