मध्य प्रदेश कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी है। जानिए क्या है UCC का इतिहास, अन्य राज्यों की स्थिति और सीएम मोहन यादव का इस पर क्या कहना है।

जगदीशपुर में मोहन कैबिनेट
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में 'यूसीसी विधेयक-2026' के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है, और इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार इसे विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब सबकी निगाहें कल से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं।

कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न केवल वर्तमान निर्णयों पर चर्चा की, बल्कि भोपाल के समृद्ध ऐतिहासिक संदर्भ को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश और राजा भोज के काल से जुड़ा है, जो सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री ने मदन शाह और संग्राम शाह जैसे गोंड शासकों के योगदान को याद करते हुए रानी कमलापति के साहस और संघर्ष का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास विभिन्न संस्कृतियों और शासकों का संगम रहा है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
जगदीशपुर में हुई इस कैबिनेट बैठक को बेहद खास तरीके से आयोजित किया गया था। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों द्वारा लोक कलाओं की जीवंत प्रस्तुति दी गई, साथ ही जनजातीय संस्कृति पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। जिस सभागार में मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हुई, वहां राज्य के जनजातीय वीर नायकों के चित्र सुशोभित थे, जो सरकार की जनजातीय गौरव को सम्मान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। संदेश की स्पष्टता के लिए, मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल बैठक स्थल तक इलेक्ट्रिक बसों से पहुँचा, जो पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश था।
उत्तराखंड (जनवरी 2025): उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना। फरवरी 2024 में विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद, जनवरी 2025 में नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली।
गुजरात (मार्च 2026): मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात UCC बिल पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बना।
असम (मई 2026): मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम ने यह बिल पारित किया। इसमें अनुसूचित जनजातियों (पहाड़ी और मैदानी) को दायरे से बाहर रखा गया है और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को सुरक्षा दी गई है।
गोवा का विशेष संदर्भ: गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड के तहत UCC पहले से लागू है, लेकिन आजादी के बाद नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड ने अग्रणी भूमिका निभाई है।
समान नागरिक संहिता की मांग कोई नई नहीं है। इसका इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है....
1835: ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट के माध्यम से देश भर में आपराधिक और अनुबंध कानूनों को एक समान बनाने का आह्वान किया था।
1941: बीएन राव समिति का गठन हुआ, जिसने हिंदू महिलाओं के अधिकारों के लिए एक समान कोड का सुझाव दिया।
1948: आजादी के बाद संविधान सभा में 'हिंदू संहिता विधेयक' पेश किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करना था।
अब मध्य प्रदेश का यह कदम देश के कानूनी ढांचे में समानता लाने के राष्ट्रव्यापी प्रयासों की कड़ी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
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