मैहर त्रिकूट वासिनी मां शारदा मंदिर में प्रबंधक समिति ने प्रथम और द्वितीय तल पर कैंटीन संचालन के लिए निविदा जारी की है। इसमें पानी के पाउच, बोतल, बिस्किट और चिप्स बेचने की अनुमति प्रस्तावित है। पहले आग की घटना के बाद कैंटीन पर रोक लगी थी, लेकिन अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा को नजरअंदाज कर कमाई पर जोर दिया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि समिति श्रद्धालुओं को मुफ्त शुद्ध पेयजल क्यों नहीं उपलब्ध करा सकती।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
आस्था का केंद्र त्रिकूट वासिनी मां शारदा मंदिर एक बार फिर चर्चाओं में है। मंदिर की शारदा प्रबंधक समिति द्वारा हाल ही में जारी की गई एक निविदा सुरक्षा के लिहाज से कई सवाल खड़े कर रही है। यह निविदा मंदिर परिसर के प्रथम और द्वितीय तल पर कैंटीन संचालन के लिए जारी की गई है, जहां पानी के पाउच, बोतल, बिस्किट और चिप्स जैसी वस्तुओं की बिक्री प्रस्तावित है। मां शारदा मंदिर परिसर में पॉलीथिन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, बावजूद इसके अब उसी परिसर में प्लास्टिक पाउच में पानी बेचने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कैंटीन खोले जाने हेतु समिति द्वारा निविदा जारी की गई है, जबकि अर्सा पूर्व ऐसी ही एक कैंटीन में घटी अग्निदुर्घटना के बाद मंदिर परिसर व पहाड़ी के रास्तों पर किसी प्रकार की कैंटीन के संचालन पर रोक लगा दी गई थी।
धर्मस्थलों में सब कुछ सशुल्क
धर्मस्थल भी अब कमाई का जरिया का बनते जा रहे हैं। मैहर व चित्रकूट जैसे धर्म स्थलों पर पहुंचकर यह देखा जा सकता है। कभी चित्रकूट में धर्मशालाओं व मंदिरों में रहना निशुल्क होता था लेकिन अब वही मंदिर और धर्मशालाएं किसी लाज की तरह हो गए हैं जहां रूकने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है। मैहर भी इससे अछूता नहीं है, जहां सब कुछ सशुल्क है। गाड़ी खडा करना हो, बाथरूम या शौचालय जाना हो , मंदिर में प्रवेश करना हो, मुंडन कराना हो या फिर कथा करानी है निर्धारित शुल्क चुकाना ही पड़ता है। प्रशासन बार-बार यह दावा करता है कि श्रद्धालुओं को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, पर जब पीने के पानी तक को बेचने की तैयारी हो, तो इस दावे की सच्चाई अपने-आप सामने आ जाती है।
सुरक्षा से खिलवाड़
दरअसल मैहर मंदिर के प्रथम व द्वितीय तल में कैंटीन संचालन की योजना तैयार की जा रही है। पानी के पाउच ,बोतल एवं बिस्किट, चिप्स आदि की कैंटीन चलाने निविदा भी जारी की गई है जिसको लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अर्सा पूर्व मंदिर की पहाड़ी पर संचालित चाय -पानी की ऐसी ही कैंटीन में आग भड़कने से मची अफरा-तफरी के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से तत्कालीन एसडीएम व प्रशासम गौतम सिंह ने कैंटीन संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन अब नई व्यवस्था में एक बार पुन: कैंटीन संचालन की कवायद की जा रही है। स्थनीय जनमानस सवाल उठा रहा है कि जिस प्रथम और द्वितीय तल पर दर्शनार्थियों के लिए बैठने और खड़े होने तक की सुरक्षित जगह नहीं है वहां कैंटीन का संचालन भीड़ प्रबंधन को प्रभावित करेगा जिससे निपटने की कोई योजना नहीं है । एक बड़ा सवाल यह है कि क्या इन स्थलों पर श्रद्धालुओं को शारदा प्रबंधक समिति शुद्ध पेयजल तक नि: शुल्क नहीं उपलब्ध करा सकती है या फिर कैंटीन संचालन की कमाई इतनी अहम है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया जा सकता है?


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