मध्य प्रदेश के शाजापुर में किसानों की फसल बचाने और वन्यजीव संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन' के तहत बोमा पद्धति से कृष्णमृग और नीलगायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा रहा है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने ग्राम रंथभंवर पहुंचकर द्वितीय चरण का निरीक्षण किया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के साथ-साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। 'किसान कल्याण वर्ष' के तहत किसानों की फसलों को जंगली जानवरों—विशेषकर कृष्णमृग (Blackbuck) और नीलगाय—से होने वाले नुकसान से बचाने और साथ ही वन्यजीवों को सुरक्षित आवास प्रदान करने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शाजापुर जिले के ग्राम रंथभंवर पहुंचकर 'प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन' (Project Antelope Translocation) के द्वितीय चरण के रेस्क्यू अभियान का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

शाजापुर जिले में किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष बोमा तकनीक से कृष्णमृगों और नीलगायों को रेस्क्यू करने का अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका से आई विशेष टीम की तकनीकी मदद ली जा रही है। बोमा पद्धति में कैमोफ्लाज्ड जाल और बाड़े बनाकर हेलीकॉप्टर की मदद से वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से घेरा जाता है और उन्हें बिना किसी चोट के पकड़ा जाता है। सीएम डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू के दौरान जानवरों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
शाजापुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यह रेस्क्यू अभियान 09 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के इस द्वितीय चरण में कुल 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक शाजापुर से 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया जा चुका है।
रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को उनके नए और सुरक्षित प्राकृतिक आवासों जैसे श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट (Rani Durgavati Reserve Forest) में भेजा जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष रूप से 11 ट्रकों को लगाया गया है। परिवहन के दौरान वन्यजीवों की देखभाल के लिए पशु चिकित्सकों (Veterinarians), आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक के संयोजन से चलाया जा रहा यह वन्यजीव रेस्क्यू अभियान दक्षिण एशिया (South Asia) में अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रयास है। यह पहल दोहरा लाभ देगी—एक तरफ जहां वन्यजीवों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें तबाह होने से बचेंगी। उन्होंने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि इस परियोजना की सफलता देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति तथा वहां की व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान (Camouflaged Watchtower) पर चढ़कर बोमा पद्धति से किए जा रहे रेस्क्यू कार्य को देखा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने अभियान में शामिल वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ एक समूह छायाचित्र (Group Photo) भी खिंचवाया।

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